Bokaro: पहाड़ की चोटी, घने जंगल और प्राकृतिक गुफा में विराजमान लुगुबाबा का धाम एक बार फिर देश-दुनिया के संताल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने जा रहा है. ललपनिया स्थित लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगढ़ में 22 से 24 नवंबर तक 26वें अंतरराष्ट्रीय संताल सरना धर्म महासम्मेलन का आयोजन होगा. सोहराय कुनामी यानी कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन को लेकर तैयारियां अब तेज हो गयी हैं.


तीन दिन, हजारों श्रद्धालु और आस्था का बड़ा संगम
महासम्मेलन में झारखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी संताल श्रद्धालुओं, धर्मगुरुओं और प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है. इसे देखते हुए आयोजक समिति के साथ जिला प्रशासन ने भी तैयारियों को गति दी है. आयोजन स्थल से लेकर श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले रास्तों तक जरूरी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने की कवायद चल रही है.
छह किलोमीटर की चढ़ाई, फिर प्राकृतिक गुफा में दर्शन
लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगढ़ संताल समाज के लिए सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उसकी आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है. लुगुबुरु पहाड़ की चोटी पर स्थित प्राकृतिक गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब छह किलोमीटर की कठिन पहाड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है. रास्ता चुनौतीपूर्ण है, लेकिन आस्था के आगे यह मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है.

“लुगुबाबा के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग”
स्थानीय संताल निवासी बाबूली सोरेन कहते हैं, “लुगुबाबा का आशीर्वाद लेने के लिए लोग कई किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचते हैं. पहाड़ की चोटी पर प्राकृतिक गुफा में पूजा-अर्चना करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है.” उनके मुताबिक, धार्मिक आस्था के साथ पहाड़ी और जंगल का प्राकृतिक वातावरण भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है.
जंगल की खूबसूरती के बीच चुनौती भी
लगभग 3,500 हेक्टेयर में फैला वन क्षेत्र, पहाड़ी ढलान और आसपास बहने वाले जलस्रोत इस पूरे इलाके को अलग पहचान देते हैं. लेकिन यही घना जंगल रात के समय चुनौती भी बन जाता है. वन्यजीवों की मौजूदगी को देखते हुए महासम्मेलन के दौरान सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी.
तीन बैठकों के बाद तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार
आयोजक समिति अब तक करीब तीन बैठकें कर चुकी है. इनमें कार्यक्रम की रूपरेखा से लेकर श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं तक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई है. संबंधित विभागों के साथ पत्राचार और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी जारी हैं.
27 सितंबर की बैठक में तय हुई जिम्मेदारियां
महासम्मेलन की तैयारियों को लेकर 27 सितंबर को ललपनिया गेस्ट हाउस में उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में प्रशासनिक समीक्षा बैठक हुई थी. बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की गयी और जरूरी दिशा-निर्देश दिये गये. प्रशासन ने सभी प्रमुख तैयारियां 18 नवंबर तक पूरी करने का लक्ष्य रखा है.
पानी से लेकर पार्किंग तक, हर व्यवस्था पर नजर
महासम्मेलन में संभावित भीड़ को देखते हुए पेयजल, स्वच्छता, बिजली, प्रकाश, यातायात और पार्किंग की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है. श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और आवाजाही को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक इंतजाम किये जाएंगे.
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
तीन दिवसीय आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी. प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को भी अंतिम रूप देगा.
18 नवंबर तक पूरा होगा तैयारी का पहला चरण
महासम्मेलन शुरू होने से पहले सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने का निर्देश दिया गया है. 18 नवंबर तक व्यवस्थाएं पूरी करने के बाद आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों का अंतिम निरीक्षण किया जाएगा. प्रशासन और आयोजक समिति की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को आस्था के इस बड़े आयोजन में किसी तरह की परेशानी न हो और लुगुबुरु में तीन दिनों तक धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से चलता रहे.
