Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट यानी BSL – देश का नामी स्टील प्लांट और सेल का महारत्न उपक्रम। प्लांट के अंदर उत्पादन के आंकड़े चमक रहे हैं, मशीनें दौड़ रही हैं, लक्ष्य पूरे हो रहे हैं और उपलब्धियों की सूची लगातार लंबी हो रही है। लेकिन जरा प्लांट के गेट से बाहर निकलकर बोकारो स्टील सिटी में घूम लीजिए। यहां भी एक ‘उत्पादन’ जोरदार तरीके से चल रहा है – समस्याओं का उत्पादन !
कभी झारखंड के सबसे खूबसूरत और सुनियोजित शहरों में गिने जाने वाले बोकारो की तस्वीर अब जगह-जगह सवाल पूछती नजर आती है। फर्क बस इतना है कि शहर के सवालों का कोई डिस्पैच सेक्शन नहीं है, जहां से उन्हें समय पर बाहर भेज दिया जाए।
प्लांट में गलती हुई तो शोकॉज, शहर में हुई तो ‘देखेंगे’
BSL के प्लांट के अंदर लापरवाही पर जवाबदेही तय होने की व्यवस्था है। हादसा हुआ तो जांच, नोटिस, शोकॉज और कार्रवाई – यानी यहां ‘क्यों हुआ ?’ पूछने की परंपरा अभी जिंदा है। अधिकारियों, ठेकेदारों में डर है। उन्हें पता है ईडी वर्क्स ऊपर से मुस्कुराते दिखते है, लेकिन गलती पर किसी का सुनते नहीं, न छोड़ते है। पिछले साल एसएमएस समेत अन्य यूनिट में हुए हादसे के बाद भी जिम्मेदारी तय किए जाने और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात सामने आई थी। अधिकारी प्लांट के अंदर जिस सख्ती और जवाबदेही के साथ काम करते हैं, उसका सकारात्मक असर भी साफ दिखाई देता है।

लेकिन प्लांट के बाउंड्री के बाहर शहर की तरफ आइए तो हाल गजब है। यहां सवाल पूछने वाली जनता है और जवाब का इंतजार भी जनता ही करती है। किसी आला अधिकारी का डर नहीं, अधिकतर मामलो में एडीएम में बैठे अधिकारी अनदेखा करते है या इग्नोर करते है। फ्रंट में नहीं आते। योजनाएं कागज पर तैयार हैं, शहर जमीन पर इंतजार कर रहा है। नतीजा यह कि समस्याएं बढ़ती जा रही हैं और कार्रवाई की रफ्तार सवालों के घेरे में है।

शहरवासी सवाल कर रहे है ?
लोगों का आरोप है कि प्लांट के बाहर अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अपेक्षाकृत बेफिक्र नजर आते हैं। बिजली और हाउस अलॉटमेंट विभाग थोड़ा सजग है, पर इनके आलावा अधिकतर विभाग में काम करवाने के लिए आपके पास सीजीएम या जीएम लेवल की पैरवी है तो काम जल्दी होगा, नहीं तो भगवान भरोसे रहिये। शहरवासी सवाल कर रहे हैं ड्रेनेज क्यों जाम ? अतिक्रमण क्यों ? पार्क क्यों उजड़ रहे हैं ? पानी की समस्या क्यों ? बिजली चोरी क्यों ? जर्जर क्वार्टर क्यों ? और जवाब ? शायद फाइल रास्ते में है….।
सवाल सिर्फ शहर का नहीं, BSL की छवि का है
BSL प्रबंधन के इस दोहरे रवैये का खामियाजा पूरा शहर भुगत रहा है। पार्किंग स्टैंड, नॉन-रेजिडेंशियल बिल्डिंग रिन्यूअल और मैपिंग जैसे नए और हितकारी दिखने वाले प्लान जमीन पर नहीं उतर पाए हैं। शहर की रौनक फीकी पड़ रही है, पब्लिक हेल्थ का हाल खराब है, वाटर सप्लाई पानी और इलेक्ट्रिसिटी विभाग बिजली चोरी पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे, जिससे सेल को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, पार्कों का अस्तित्व सिमट रहा है और बोकारो जू भी अपनी पहचान खोता दिख रहा है। ब्लॉक जर्जर होकर डैमेज घोषित किए जा रहे हैं, प्लॉट होल्डर दबाव में हैं और फायर सेफ्टी को लेकर शुरू हुई एक्सरसाइज भी ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। करीब 80 टन कचरे का खुले मैदान में निस्तारण का सवाल कायम है, BGH की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, विस्थापित हल्ला बोल की स्थिति में हैं और आम जनता परेशान है। कुल मिलाकर हालात कुछ ऐसे हैं – ‘Rome जल रहा है और …’
Public Health: नाम पब्लिक का, दर्द भी पब्लिक का

शहर के नक्शे पर बीएसएल की छवि को सबसे ज्यादा धूमिल करने वाला विभाग अगर कोई है तो वह पब्लिक हेल्थ है। कचरा निस्तारण से लेकर ड्रेनेज और सफाई तक की जिम्मेदारी इसी विभाग पर है। ड्रेनेज की बदहाली के कारण बरसात के दिनों में सिटी सेंटर और लक्ष्मी मार्केट की तस्वीरें बीएसएल की छवि पर सवाल खड़े कर रही हैं। इतिहास में पहली बार कोई डिप्टी कमिश्नर (DC) बोकारो स्टील सिटी का दौरा कर बीएसएल प्रबंधन को आईना दिखा चुके है, फिर भी अधिकारियों पर इसका खास असर नजर नहीं आ रहा। सब कुछ ‘क्या फर्क पड़ता है…’ वाले मोड में चलता दिख रहा है। विधायक, नेता, यूनियन लीडर या किसी आला अधिकारी की पैरवी या फोन आए तो काम आगे बढ़ता है, वरना व्यवस्था अपनी रफ्तार से चलती रहती है। आमजन पब्लिक हेल्थ विभाग से बेहद परेशान हैं। लोगों का कहना है कि एक जीएम स्तर के अधिकारी के पास Public Health, Water Supply और Horticulture जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी होने से कार्यभार काफी अधिक है।
शहर की हालत और प्लांट एक्सपेंशन का कनेक्शन
अगर अब भी BSL प्रबंधन नहीं जागा और स्थिति संभालने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में प्लांट एक्सपेंशन (Expansion and Modernisation) के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना शीर्ष अधिकारियों के लिए चुनौती बन सकता है। पुराने शहरवासियों की मानें तो प्लांट की रौनक काफी हद तक शहर के मिजाज पर निर्भर करती है। इस संबंध में BSL के Chief of Communication मणिकांत धान से पक्ष जानने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने कहा…
बोकारो स्टील सिटी के टाउनशिप क्षेत्र के डेवलपमेंट के लिए बीएसएल प्रबंधन कटिबद्ध है और कई क्षेत्रों में कार्य प्रगति में है. जहाँ तक ड्रेनेज़ सिस्टम को दुरुस्त बनाने की बात है या पार्किंग व्यवस्था में सुधार, जन सामान्य की सुविधा को देखते हुए कॉमन एरिया से अवरोध हटाने की बात हो, इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है. जर्जर आवासों से दूसरे सुरक्षित आवास में लोगों को शिफ्ट करने के प्रयास लंबे समय से जारी है पर अपेक्षित नतीजे अभी नहीं मिले हैं. कई अन्य ऐसे पहलुओं में भी टाउनशिप की बेहतरी के लिए सभी के सहयोग की अपेक्षा है.
Manikant Dhan, BSL COC
