Bokaro: झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ठेका मजदूरों के अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताया है। सोमवार को सेक्टर-9 स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में यूनियन के महामंत्री डीसी गोहाई ने कहा कि एकता, संघर्ष, लगन और ईमानदारी के साथ किया गया हर आंदोलन सफलता की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि 8 जुलाई 2026 को देश की सर्वोच्च अदालत ने बीपीएससीएल (BPSCL) में कार्यरत ठेका मजदूरों के पक्ष में फैसला सुनाकर उनके लंबे संघर्ष को न्याय दिलाया है।

2009 से 2011 तक की AWA राशि का करना होगा भुगतान
डीसी गोहाई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बीपीएससीएल प्रबंधन को वर्ष 2009 से 2011 तक दो वर्षों की Additional Welfare Amenity (AWA) राशि का भुगतान 6 प्रतिशत ब्याज के साथ करने का आदेश दिया है। उन्होंने इसे यूनियन और बीपीएससीएल में कार्यरत ठेका मजदूरों की बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने बताया कि AWA योजना के तहत सेल प्रबंधन की ओर से प्रत्येक ठेका मजदूर को प्रति माह 1000 रुपये भुगतान करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन बीपीएससीएल प्रबंधन ने अपने अधीन कार्यरत ठेका मजदूरों को इस राशि का लाभ देने से इनकार कर दिया था।

तीन दिवसीय हड़ताल से शुरू हुआ था आंदोलन
यूनियन महामंत्री ने कहा कि मजदूरों के हक के लिए झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के नेतृत्व में जोरदार आंदोलन किया गया। इसके तहत बीपीएससीएल प्लांट में तीन दिवसीय हड़ताल कर प्रबंधन के खिलाफ आवाज बुलंद की गई थी। इसके साथ ही औद्योगिक विवाद अधिनियम-1947 के तहत कानूनी लड़ाई भी शुरू की गई।
उन्होंने बताया कि यूनियन की ओर से धनबाद स्थित केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण (Central Industrial Tribunal) में मामला दर्ज कराया गया था, जहां मजदूरों के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद बीपीएससीएल प्रबंधन ने इस आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी मजदूरों के पक्ष में दिए गए फैसले को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, मजदूरों को मिला न्याय
इसके बाद प्रबंधन ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। गोहाई ने बताया कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी ठेका मजदूरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रबंधन को AWA राशि ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया। डीसी गोहाई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न केवल बीपीएससीएल के ठेका मजदूरों के लिए राहत है, बल्कि देशभर के श्रमिकों के अधिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश है। उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाओं का पालन नहीं करने वाले प्रबंधन के लिए यह फैसला एक कानूनी चेतावनी है।
मजदूरों की एकजुटता को बताया सफलता की कुंजी
यूनियन नेताओं ने कहा कि यह फैसला साबित करता है कि उचित मांगों को लेकर संगठित संघर्ष और मजबूत नेतृत्व के माध्यम से मजदूर अपने अधिकार हासिल कर सकते हैं। उन्होंने सभी ठेका मजदूरों से एकजुट रहने की अपील की। प्रेस वार्ता में यूनियन के पदाधिकारी सुजीत सिंह, संजीव कुमार राय, आरसी प्रसाद, नंद कुमार, बिनोद राम, राजेश सिंह और हरदेव राम सहित कई अन्य सदस्य मौजूद थे।

