Bokaro: विस्थापित अप्रेंटिस संघ के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के सातवें दिन शुक्रवार को बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के मुख्य गेट को छोड़कर अन्य सभी गेटों को बंद किए जाने के बाद प्रबंधन ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने शुक्रवार सुबह बीएसएल के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन को धरना स्थल पर पहुंचकर आमने-सामने बातचीत करने की चुनौती दी थी। इसके बाद शाम को बीएसएल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए सभी नागरिकों एवं विस्थापितों से गतिरोध समाप्त करने की अपील की।


संयंत्र पर निर्भर है पूरे बोकारो का जनजीवन
बीएसएल प्रबंधन ने अपने बयान में कहा कि बोकारो इस्पात संयंत्र केवल कर्मचारियों की आजीविका का आधार नहीं, बल्कि पूरे बोकारो क्षेत्र के जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ है। ठेका श्रमिकों, आपूर्तिकर्ताओं, ट्रांसपोर्टरों, छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, सेवा प्रदाताओं और उनके परिवारों की आजीविका भी संयंत्र के सुचारु संचालन पर निर्भर करती है।
10 अक्टूबर से जारी है भूख हड़ताल
प्रबंधन के अनुसार, विस्थापित 10 अक्टूबर 2026 से प्रशासनिक भवन के सामने निर्धारित धरना स्थल पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। शुक्रवार को मुख्य गेट को छोड़कर अन्य सभी गेटों को भी अवरुद्ध कर दिया गया, जिससे संयंत्र में आवश्यक कच्चे माल और अन्य सामग्रियों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। बीएसएल ने कहा कि प्रबंधन विस्थापितों की भावनाओं का सम्मान करता है और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। प्रबंधन ने आंदोलनकारियों से भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया है।

भर्ती नियमों का दिया हवाला
विस्थापितों की रोजगार संबंधी मांगों के संदर्भ में बीएसएल प्रबंधन ने कहा कि भारत सरकार के अधीन केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) में भर्ती भारत सरकार के निर्धारित नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार की जाती है।
उत्पादन में कटौती की जताई आशंका
प्रबंधन ने चेतावनी दी कि मौजूदा गतिरोध के कारण संयंत्र का संचालन प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है। बीएसएल एक ताप-संवेदी संयंत्र है, जहां कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है। इसके लिए महत्वपूर्ण उपकरणों और इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है।
प्रबंधन के मुताबिक, बंद इकाइयों को दोबारा चालू करना कठिन, समयसाध्य और खर्चीला होगा। इससे संयंत्र, कर्मचारियों और पूरे क्षेत्र को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचने के साथ राज्य को भी वित्तीय क्षति हो सकती है।
बातचीत से समाधान निकालने की अपील
बीएसएल प्रबंधन ने कहा कि मौजूदा स्थिति संयंत्र के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। उसने सभी नागरिकों और विस्थापितों से गतिरोध समाप्त करने तथा आपसी बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि, विस्थापितों की रोजगार संबंधी मांगों और विधायक श्वेता सिंह द्वारा निदेशक प्रभारी को धरना स्थल पर सीधे बातचीत के लिए दिए गए आमंत्रण के बीच अब प्रबंधन की अगली पहल पर नजर रहेगी।
