Bokaro : शहर के सेक्टर-12 में जर्जर क्वार्टर के जमींदोज होने की घटना के बाद बोकारो स्टील प्लांट (BSL) प्रबंधन और जिला प्रशासन असुरक्षित भवनों को लेकर अब पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट और सख्त निर्देश के बाद बीएसएल प्रबंधन ने वर्ष 2024 में असुरक्षित घोषित किए गए 169 ब्लॉकों के 1,263 क्वार्टरों को खाली कराने की रणनीति पर युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, बीएसएल टॉप मैनेजमेंट इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है। बहुत जल्द इसका असर धरातल पर दिखाई देने की संभावना है।

दो साल में सिर्फ करीब 150 क्वार्टर हुए खाली
बीएसएल ने वर्ष 2024 में संरचनात्मक जांच के बाद 169 ब्लॉकों को असुरक्षित घोषित किया था। इसके बावजूद अब तक करीब 150 क्वार्टर ही खाली कराए जा सके हैं। बड़ी संख्या में लोग अभी भी इन असुरक्षित आवासों में रह रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से वैकल्पिक आवास में शिफ्टिंग का विकल्प भी उनके सामने है। पर अधिकतर लोग शिफ्ट करने से कतरा रहे है। जो प्रसाशन और प्रबंधन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
खराब वैकल्पिक क्वार्टर और अवैध कब्जा बड़ी बाधा
शिफ्टिंग में सबसे बड़ी परेशानी वैकल्पिक क्वार्टरों की स्थिति और उपलब्धता को लेकर सामने आ रही है। प्रभावित लोगों के अनुसार, उन्हें जो वैकल्पिक आवासों की सूची मिलती है, उनमें कई क्वार्टर बेहद खराब स्थिति में हैं। वहीं बेहतर स्थिति वाले कई क्वार्टरों पर कथित रूप से अवैध कब्जा है। उन्हें अच्छे हालत में क्वार्टर मुहैया करना बीएसएल के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में बीएसएल अब वैकल्पिक आवास की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए करीब 2,500 चिन्हित क्वार्टरों से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई भी तेज करने की तैयारी में है। इससे असुरक्षित क्वार्टरों में रह रहे लोगों को बेहतर स्थिति वाले आवास में शिफ्ट करने के लिए विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।

216 बीएसएल कर्मियों पर भी कसेगा शिकंजा
असुरक्षित ब्लॉकों में रहने वाले 216 बीएसएल कर्मियों को लेकर भी प्रबंधन सख्त रुख अपना सकता है। जरूरत पड़ने पर नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा, शहर भर में ऐसे बीएसएल कर्मचारियों की भी सूची तैयार की जा रही है जिन्होंने अपने आवंटित क्वार्टर कथित तौर पर किराये पर दे रखे हैं। हाउस अलॉटमेंट विभाग इस संबंध में जानकारी जुटा रहा है और उनपर कड़ा एक्शन लेने की तैयारी कर रहा है। प्रबंधन का फोकस अब दो स्तरों पर है – एक तरफ असुरक्षित भवनों में रह रहे लोगों को सुरक्षित आवास में शिफ्ट करना और दूसरी तरफ बेहतर स्थिति वाले क्वार्टरों को खाली कराकर उन्हें वैकल्पिक आवास के रूप में उपलब्ध कराना।
छह बार नोटिस के बाद अब सख्त कदम की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, असुरक्षित क्वार्टरों को खाली कराने के लिए बीएसएल प्रबंधन पहले ही 6 बार नोटिस और लीगल नोटिस जारी कर चुका है। अब लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अगले चरण में 169 असुरक्षित ब्लॉकों के सभी क्वार्टरों के लाइसेंस, लीज और आवंटन को रद्द (cancel) करने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रबंधन पहले से ही वास्तविक और वैध रूप से रह रहे लोगों से वैकल्पिक क्वार्टर में शिफ्ट होने का आग्रह कर रहा है। यदि अब भी कोई क्वार्टर खाली नहीं करता है, तो नियमों के तहत उसे रद्द कर अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में लेकर कार्रवाई की जा सकती है।
जिला प्रशासन भी बीएसएल के साथ
सेक्टर-12 की घटना के बाद जिला प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच कराई। एसडीएम, चास की जांच रिपोर्ट के आधार पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत बीएसएल को असुरक्षित भवनों को चिह्नित कर खाली कराने, मरम्मत कराने या आवश्यक होने पर ध्वस्त करने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
जांच रिपोर्ट राज्य के गृह विभाग को भी भेजी जा चुकी है।
अब प्रशासन और बीएसएल प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि असुरक्षित घोषित क्वार्टरों में रह रहे लोगों को सुरक्षित तरीके से वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए। सेक्टर-12 की घटना के बाद इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश कम हो गई है। आने वाले दिनों में असुरक्षित क्वार्टरों को लेकर बोकारो में बड़े पैमाने पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
