An 83-year-old Bokaro man, wrongly declared dead in government records, continued struggling for pension arrears despite restoration in November 2025. The matter reached Chief Minister Hemant Soren, prompting administrative action.
Bokaro: सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित किए जाने के कारण वृद्धावस्था पेंशन से वंचित हुए 83 वर्षीय धरणीधर मांझी की पेंशन नवंबर 2025 में ही नियमित कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वह लंबे समय से बकाया राशि के भुगतान के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद प्रशासन फिर सक्रिय हुआ है।

खुद को जिंदा साबित करने की लड़ाई
चंदनकियारी प्रखंड के गोपीनाथपुर गांव निवासी धरणीधर मांझी पिछले कई वर्षों से खुद को “जिंदा” साबित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2022-23 में पंचायत स्तर पर हुए भौतिक सत्यापन के दौरान उन्हें गलती से मृत घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई।
अधिकारियों से लगाई गुहार
धरणीधर मांझी ने बताया कि वह लगातार बीडीओ, डीसी और डीडीसी कार्यालय का चक्कर लगाते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा था, “साहब, मैं जिंदा हूं, मुझे कागज पर मत मारिए।” उनका आरोप है कि मुखिया, पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कर्मियों की रिपोर्ट में हुई गलती के कारण यह स्थिति बनी।

सोशल मीडिया से मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
मामला सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री Hemant Soren तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने एक्स पर पोस्ट कर बोकारो प्रशासन को जांच कर जरूरतमंद परिवार को सहायता देने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने दी स्थिति की जानकारी
इस पर बोकारो उपायुक्त Ajay Nath Jha ने बताया कि यह मामला नवंबर 2025 में जनता दरबार में आया था, जिसके बाद तत्काल पेंशन नियमित कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि नवंबर 2025 से मार्च 2026 तक की पेंशन राशि का भुगतान हो चुका है। फिलहाल पूर्व अवधि की बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है और जल्द निर्णय लिया जाएगा।
बीडीओ पहुंचे घर, दिया आश्वासन
उपायुक्त के निर्देश पर गुरुवार को चंदनकियारी बीडीओ अजय वर्मा धरणीधर मांझी के घर पहुंचे और उन्हें मामले की प्रगति की जानकारी दी। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि लंबित राशि का समाधान शीघ्र किया जाएगा।

