Bokaro: क्या बोकारो स्टील प्लांट (BSL) प्रबंधन स्थानीय विधायक श्वेता सिंह और विस्थापितों के दर्द को गंभीरता से नहीं ले रहा है ? अपनी जमीन देकर बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना का रास्ता देने वाले परिवार आज नियोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शनिवार, 10 अक्टूबर से शुरू हुई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में विधायक समेत सैकड़ों विस्थापित, महिलाएं और अप्रेंटिस विद्यार्थी शामिल हैं। लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद शाम को जब प्रबंधन की ओर से मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) वार्ता के लिए पहुंचे, तो बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।

इस घटनाक्रम ने आंदोलन स्थल पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या सैकड़ों लोगों की पीड़ा और एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की भूख हड़ताल भी बीएसएल प्रबंधन को निर्णायक पहल करने के लिए पर्याप्त नहीं है ? क्या इतना असंवेदनशील हो गया है बीएसएल प्रबंधन ? ये बातें चर्चा में हैं.
विधायक बैठी रहीं भूख हड़ताल पर, प्रबंधन की पहल पर उठे सवाल
बोकारो स्टील प्लांट के मुख्यालय स्थित एडीएम बिल्डिंग के सामने टू टैंक गार्डन में विस्थापित अप्रेंटिस संघ (VAS), विभिन्न विस्थापित संगठनों और प्रभावित परिवारों का आंदोलन जारी है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इतने गंभीर मामले में प्रबंधन के किसी वरिष्ठ निर्णयकर्ता का समय पर सामने नहीं आना उनकी पीड़ा को और बढ़ाता है।

शाम को मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) वार्ता के लिए पहुंचे। उन्होंने कंपनी की स्थिति और अपनी सीमाओं का हवाला दिया, लेकिन विस्थापितों को नियोजन पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल सका। नतीजतन, बातचीत विफल रही और आंदोलनकारियों की निराशा और गहरी हो गई। सभा स्थल पर चर्चा होती रही कि जब एक स्थानीय विधायक 24 घंटे से अधिक समय से भूख हड़ताल पर बैठी हैं, तब प्रबंधन की ओर से ऐसा अधिकारी क्यों नहीं आया, जिसके पास मामले में निर्णायक फैसला लेने का अधिकार हो।
विस्थापितों का दर्द: जमीन हमारी, हक के लिए संघर्ष क्यों?
विस्थापित नेता सहदेव साव और अशोक कुमार महतो ने प्रबंधन के रवैये पर दुख जताया। बोकारो की विधायक भी भूख हड़ताल पर बैठी है पर शायद बीएसएल इसे भी अनदेखा कर रहा है। 24 घंटे बाद भी प्रबंधन ने भेजा तो सीजीएम एचआर को। क्या आला अधिकारी वार्ता करने नहीं सकती या सकते थे। ये बहुत दुखी करने वाली बात है।
भूख हड़ताल में बैठे अशोक कुमार महतो ने कहा ये बेहद निराशाजनक है। राज्य में सरकार कांग्रेस की, बोकारो विधायक कांग्रेस की, इसके बावजूद भी बीएसएल इस प्रदर्शन को संजीदगी से लेता नहीं दिख रहा है। “विधायक 24 घंटे से भूख हड़ताल पर हैं, फिर भी कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा।”
मां भगवती पर भरोसा, प्रबंधन से अब भी उम्मीद
भूख हड़ताल में शामिल विधायक श्वेता सिंह ने प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, “रात भर हम लोग यहीं रहे और यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि अभी तक कोई यहां आकर यह देखने नहीं आया कि किस परिस्थिति में कौन है और उनकी तबीयत कैसी है। अब मां शक्ति दें हम लोगों को। मां भगवती पर ही भरोसा है।” विधायक ने कहा कि विस्थापित परिवारों की नियोजन संबंधी मांग गंभीर है और इसका समाधान होना चाहिए।
आंदोलन में पुराना दर्द भी शामिल
भूख हड़ताल में बड़ी संख्या में अप्रेंटिस विद्यार्थी शामिल हैं। वर्ष 2025 में एडीएम बिल्डिंग गेट पर हुए आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले प्रेम प्रसाद की मां गोमती देवी की मौजूदगी इस संघर्ष के पुराने जख्मों की याद दिलाती है। विस्थापित अप्रेंटिस संघ के सदस्य सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि ठोस कार्रवाई शुरू होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। विस्थापित नेता दुर्गा चरण महतो ने भी कहा कि विधायक के आंदोलन में शामिल होने से उन्हें मजबूती मिली है और वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
बीएसएल के सामने बड़ा सवाल
पूछने पर भी, इस मामले में बीएसएल के चीफ ऑफ कम्युनिकेशन मणिकांत धान के तरफ से कोई आधिकारिक ब्यान नहीं आया है। ऐसे में नियोजन की मांग पर जारी गतिरोध बरकरार है।
