Bokaro: चिन्मय विद्यालय, बोकारो में बुधवार, 28 अक्टूबर को स्वामी तपोवन सभागार में मातृ पूजा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कक्षा तीन से पांचवीं तक के विद्यार्थियों ने विधि-विधान से अपनी माताओं की पूजा कर उनके प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। पूजा के दौरान विद्यार्थियों ने मां के चरणों में पुष्प अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया। पूरे कार्यक्रम में भक्ति, वात्सल्य और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला।


स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती के मार्गदर्शन में संपन्न हुई पूजा
मातृ पूजा का आयोजन चिन्मय मिशन बोकारो की आवासीय आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के सचिव महेश त्रिपाठी, प्रभारी प्राचार्य नरमेंद्र कुमार तथा मिडिल विंग की एकेडमिक सुपरवाइजर रश्मि सिंह उपस्थित रहे। पूजा की शुरुआत माता वंदना से हुई। इसके बाद स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती ने विद्यार्थियों को प्रत्येक धार्मिक विधि की जानकारी देते हुए उनसे अपनी माताओं की पूजा संपन्न कराई।
मां के 108 नामों का जाप, पुष्प अर्पित कर लिया आशीर्वाद
पूजा के दौरान विद्यार्थियों को संकल्प कराया गया और माताओं की आरती उतारी गई। इसके बाद मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप का ध्यान करते हुए उनके 108 नामों का जाप किया गया। प्रत्येक नाम के उच्चारण के साथ विद्यार्थियों ने अपनी माताओं के चरणों में एक-एक पुष्प अर्पित किया। सभी ने दीप दिखाकर मां की वंदना की और पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही, पद-प्रणाम कर अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगी। अंत में माताओं ने अपने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद दिया। इस भावुक क्षण में कई माताओं और विद्यार्थियों की आंखें नम हो गईं।

मां साक्षात भगवान का स्वरूप, उनकी वंदना से मिलती है शक्ति
स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती ने माताओं को समर्पित एक छंद प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। उन्होंने वात्सल्य और मातृ प्रेम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां साक्षात भगवान का स्वरूप होती हैं। शक्ति और स्नेह, दोनों का अद्भुत संगम मां में देखने को मिलता है। मां की वंदना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा उनके प्रेम और स्नेह से जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि मां की पूजा और वंदना से बढ़कर कोई पूजा नहीं है।
किताबी ज्ञान के साथ संस्कार और आध्यात्मिक शिक्षा पर जोर
स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती ने कहा कि चिन्मय विद्यालय में विद्यार्थियों को किताबी शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आध्यात्मिक ज्ञान भी प्रदान किया जाता है। मातृ पूजा जैसे आयोजनों का उद्देश्य बच्चों में माता-पिता के प्रति सम्मान, कृतज्ञता, प्रेम और अच्छे संस्कार विकसित करना है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को मां के त्याग, स्नेह और समर्पण के महत्व को समझने का अवसर दिया।
