Bokaro Police recovered 47 lost mobiles using CEIR portal and returned them to owners. However, questions remain as “wrong users” were not traced. Many phones were found in damaged condition after months or years of use before recovery.
Bokaro : बोकारो पुलिस ने CEIR पोर्टल की मदद से 47 मोबाइल बरामद कर मालिकों को सौंप दिए। प्रेस विज्ञप्ति में इसे बड़ी सफलता बताया गया, लेकिन मोबाइल लेने पहुंचे कई लोगों के चेहरे पर खुशी से ज्यादा सवाल नजर आए। वजह साफ थी – पुलिस मोबाइल तक तो पहुंच गई, मगर इतने महीनों और सालों तक उन फोन का इस्तेमाल कौन करता रहा, यह पता नहीं चल सका।

स्क्रीन टूटी, बॉडी घिसी… “यूज एंड रिटर्न” स्कीम जैसा हाल
मोबाइल लेने पहुंचे लोगों ने बताया कि कई फोन की स्क्रीन टूटी हुई थी, बॉडी घिस चुकी थी और हालत देखकर साफ लग रहा था कि फोन ने “लंबी सेवा” दी है। सवाल यह है कि जब फोन लगातार किसी के इस्तेमाल में था, तो पुलिस उस व्यक्ति तक क्यों नहीं पहुंच सकी। यानी मोबाइल तो मिल गया, मगर गलत इस्तेमाल करने वाला शायद अब भी नेटवर्क से बाहर है।
“फोन वापस, केस खत्म”
लोगों के बीच चर्चा है कि पूरी कार्रवाई अब सिर्फ “मोबाइल रिकवरी समारोह” बनकर रह गई है। फोन लौट गया, फोटो खिंच गई, लेकिन चोरी किसने की या सालों तक इस्तेमाल कौन करता रहा, इस पर चुप्पी कायम है।

केस-1: चोरी हुई…
जितेंद्र साह का मोबाइल कमरे से चोरी हुआ, लेकिन प्राथमिकी की जगह सामान्य शिकायत दर्ज हुई। नौ माह बाद मोबाइल मिला, मगर जिसके पास मिला उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। मतलब फोन चोरी भी हुआ, इस्तेमाल भी हुआ, वापस भी मिला… बस चोर ही सिस्टम से अदृश्य रहा।
केस-2: 33 माह बाद “ऐतिहासिक वापसी”
सौरभ कुमार का 40 हजार का मोबाइल करीब 33 माह बाद मिला। तब तक फोन की हालत ऐसी हो चुकी थी जैसे उसने तीन मालिक और चार जिलों का सफर तय कर लिया हो। सवाल वही—इतने समय तक फोन चलाने वाला आखिर था कौन?
केस-03: पहले घंटी बजी, फिर सिस्टम शांत
अशित लकड़ा के फोन पर शुरुआती दिनों में घंटी जाती रही, फिर फोन बंद हो गया। करीब 11 माह बाद मोबाइल मिला, लेकिन तब तक वह बुरी तरह खराब हो चुका था। परिवार का कहना है कि सिर्फ मोबाइल लौटाना काफी नहीं, इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई भी जरूरी है।
झारखंड की रिकवरी रफ्तार भी सवालों में
संचार साथी पोर्टल के मुताबिक झारखंड में अब तक 28,923 शिकायतों में सिर्फ 3,750 मोबाइल रिकवर हुए हैं। यानी रिकवरी दर करीब 13 प्रतिशत। दूसरे राज्यों की तुलना में यह आंकड़ा बताता है कि यहां मोबाइल ढूंढना अब भी “नेटवर्क मिलने” जैसा मामला बना हुआ है।

