Bokaro: गुरुवार देर रात ज़िले के सदर अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया, जब 42 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट वीरेंद्र कुमार महतो का शव अस्पताल के फिजियोथेरेपी रूम में लटका हुआ मिला। सेक्टर-1C के रहने वाले महतो, नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर लगभग 12 साल से फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम कर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा गार्ड ने खोला कमरा तो सामने आया खौफनाक मंजर
जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात अस्पताल के सुरक्षा गार्ड विशाल कुमार जब फिजियोथैरेपी रूम में प्रवेश किया तो अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। वीरेंद्र कुमार महतो पंखे से रस्सी के सहारे लटके हुए थे। इसके बाद तत्काल अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी गई और पुलिस को बुलाया गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच की और कमरे से संबंधित साक्ष्य जुटाए।

जेब से मिला सुसाइड नोट, संविदा नौकरी की परेशानी का जिक्र
पुलिस के अनुसार, मृतक की पैंट की जेब से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट बरामद हुआ है। सिटी डीएसपी राजीव रंजन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में नोट में लंबे समय से संविदा नौकरी पर रहने और सरकारी स्तर पर नियमितीकरण नहीं होने को लेकर मानसिक तनाव का जिक्र मिला है। उन्होंने कहा, “पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता और उसमें लिखी बातों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।”

परिजनों का फूटा गुस्सा, मुआवजे और नौकरी की मांग
वीरेंद्र महतो की मौत की खबर मिलते ही परिजन और रिश्तेदार सदर अस्पताल पहुंचे। गम और आक्रोश के बीच उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी। परिजनों का आरोप था कि वर्षों से संविदा पर काम करने के कारण उत्पन्न मानसिक दबाव ने वीरेंद्र को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
पुलिस बोली- प्रथम दृष्टया आत्महत्या, हर पहलू की हो रही जांच
बोकारो के पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा ने कहा, “प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। वीरेंद्र कुमार महतो अकेले फिजियोथैरेपी रूम में गए थे और वहीं घटना हुई। उस वक़्त वहां कोई नहीं था। पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।” उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले सभी तथ्यों को ध्यान में रखा जा रहा है।
ड्यूटी के बाद घर नहीं लौटे, मोबाइल लोकेशन से अस्पताल पहुंची पुलिस
अस्पताल कर्मियों के मुताबिक, वीरेंद्र महतो गुरुवार सुबह करीब 9 बजे ड्यूटी पर पहुंचे थे। दोपहर 3 बजे तक उन्होंने मरीजों का इलाज किया। इसके बाद वह अस्पताल से बाहर चले गए थे और शाम करीब 5:30 बजे दोबारा अकेले अस्पताल लौटे। लेकिन देर रात तक जब वह घर नहीं पहुंचे तो परिवार वालों ने उनकी तलाश शुरू की। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उन्हें अस्पताल परिसर में ट्रेस किया, जिसके बाद घटना की जानकारी सामने आई।
शेयर ट्रेडिंग में नुकसान के एंगल की भी जांच
पुलिस इस मामले में आर्थिक पहलू की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र महतो ने शेयर ट्रेडिंग में कई लाख रुपये निवेश किए थे और उसमें नुकसान होने की बात भी सामने आ रही है। मोबाइल खंगालने पर एक दिन पहले उनके अकाउंट से 9 लाख रूपये का शेयर में निवेश भी पुलिस के संज्ञान में आया है। पुलिस को इस बात का भी पता चला है कि उन्होंने क़र्ज़ भी लिया हुआ था। पुलिस को ये भी जानकारी मिली है कि घटना से कुछ मिनट पहले उन्होंने अपनी पत्नी के बैंक खाते में 95 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और सभी संभावित कारणों की जांच की जा रही है।
परिवार में पसरा मातम, पीछे छोड़ गए पत्नी और दो बच्चे
वीरेंद्र कुमार महतो अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। मृतक महतो सदर अस्पताल की नौकरी के साथ-साथ बारी को-ऑपरेटिव क्षेत्र में अपना फिजियोथैरेपी सेंटर भी चलाते थे। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद अस्पताल कर्मियों और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है।
