State topper Chotti Kumari from Bokaro’s Khairachatar village secured 478/500 in JAC Inter Arts 2026. Daughter of a sack-lifting labourer, her success amid poverty highlights determination, self-study via YouTube, and strong academic performance without coaching.
Bokaro: जिले के ग्रामीण खैराचातर गांव में उस समय भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा जब एक साधारण गरीब परिवार की बेटी छोटी कुमारी के राज्य टॉपर बनने की खबर पहुंची। जिस घर में रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करना भी संघर्ष था, वहां आज खुशी के आंसू रुक नहीं रहे थे। छोटी के पिता भवानी कुमार नायक, जो बाजारों में “बोरा ढोने वाले मजदूर” के रूप में दिहाड़ी पर काम करते हैं, रोज़ मात्र 300 से 400 रुपये कमाकर किसी तरह घर चलाते हैं।

पिता की आंखों में आंसू, गर्व में डूबी आवाज
पिता ने भावुक होकर कहा, “हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारी बेटी इतना बड़ा नाम करेगी। हमने सिर्फ उसकी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की, बाकी उसने खुद मेहनत से कर दिखाया।” आर्थिक तंगी इतनी थी कि कई बार घर में दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था, लेकिन शिक्षा के लिए परिवार ने हार नहीं मानी।
राज्य टॉपर बनी छोटी कुमारी
इसी संघर्ष की जमीन से निकलकर छोटी कुमारी ने झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) की इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में कला संकाय में राज्य टॉप किया है। उसने 500 में से 478 अंक हासिल कर पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया। उसके बाद दुमका के अंकित कुमार ने 474 और रांची की अंशु कुमारी ने 473 अंक प्राप्त किए।

गांव में जश्न जैसा माहौल
खैराचातर, जो बोकारो जिला मुख्यालय से करीब 41 किलोमीटर दूर एक ग्रामीण क्षेत्र है, वहां इस उपलब्धि को लेकर लोग काफी खुश है। छोटी ने बताया कि वह कभी कोचिंग नहीं ली। “वो सिर्फ स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान देती थी और शिक्षकों की बातों को ध्यान से सुनती थी। जब भी कोई विषय समझ नहीं आता, वह यूट्यूब पर वीडियो देखकर बार-बार अभ्यास करती थी”।
खुद छोटी ने बताया अपनी मेहनत का रास्ता
छोटी खुद बताती है, “घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए कोचिंग संभव नहीं था। मैंने स्कूल में ध्यान दिया और घर पर 4–5 घंटे नियमित पढ़ाई की। कई बार बिजली नहीं रहती थी, तब भी मैं पढ़ती रहती थी।” छोटी कुमारी पहले भी कक्षा 10 में 88.20 प्रतिशत अंक हासिल कर चुकी है। अब उसका सपना सिविल सेवा या सरकारी शिक्षक बनना है।
प्रशासन और शिक्षकों की सराहना
जिला प्रशासन ने भी उसकी उपलब्धि की सराहना की है। उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी यह सफलता साबित करती है कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उन्होंने कहा कि यह परिणाम इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियाँ भी उस व्यक्ति को नहीं रोक सकतीं, जिसमें आगे बढ़ने का जज़्बा हो। राज्य के एजुकेशन सिस्टम में सुधार होता दिख रहा है। ग्रामीण इलाको में भी बच्चे अच्छा कर रहें है।
बोकारो का मिला-जुला प्रदर्शन, लेकिन एक नाम बना प्रेरणा
बोकारो जिले ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल इंटरमीडिएट परीक्षा में समग्र रूप से बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया है। कॉमर्स स्ट्रीम में 95.63% पास प्रतिशत के साथ 1,360 छात्र सफल हुए, जबकि आर्ट्स में 93.12% और साइंस में 84.27% परिणाम रहा। आर्ट्स में सर्वाधिक 13,038 छात्र पास हुए, वहीं साइंस में 4,127 छात्रों ने सफलता पाई। जिले के तीनों स्ट्रीम में बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की। हालांकि कुछ छात्र असफल भी रहे, लेकिन कुल मिलाकर परिणाम सकारात्मक रहे। शिक्षा अधिकारियों ने इसे जिले की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार का संकेत बताया है।

