Bokaro: रात के अंधेरे में रास्ता तलाशता एक मासूम हाथी का बच्चा… और अपनी जिंदगी बचाने की कोशिश में कुएं में गिरा एक हिरण। दोनों बेजुबान थे, अपनी पीड़ा किसी से कह नहीं सकते थे, लेकिन उनकी दर्दनाक मौत ने इंसानों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हमारी छोटी-सी लापरवाही किसी जीव की आखिरी सांस बन सकती है ?

इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए बोकारो जिला प्रशासन ने “सुरक्षित कुआं–सुरक्षित वन्यजीव” अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। रविवार को उपायुक्त अजय नाथ झा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस अभियान को लेकर भावुक संदेश साझा किया और लोगों से अपील की कि खुले कुओं को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि कोई और बेजुबान ऐसी दर्दनाक मौत का शिकार न हो। उन्होंने लिखा, “हम ऐसा कोई कुआँ नहीं छोड़ें जो किसी बेजुबान की आख़िरी मंज़िल बन जाए।”
गोपो गांव में कुएं ने छीन ली थी हाथी के बच्चे की जिंदगी
डीसी अजय नाथ झा ने अपने संदेश में गोमिया प्रखंड के गोपो गांव की उस हृदयविदारक घटना का जिक्र किया, जिसने वन्यजीवों और इंसानों के रिश्ते को एक बार फिर सामने ला दिया। उन्होंने बताया कि 24 जनवरी 2025 को रात के अंधेरे में एक किशोर हाथी भागते हुए खुले कुएं में गिर गया था। उसने बाहर निकलने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह गहरे कुएं से बाहर नहीं आ सका और उसकी जान चली गई। सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य अगले दिन देखने को मिला, जब हाथियों का पूरा झुंड उसी जगह वापस लौटा। वनकर्मियों के अनुसार, हाथी काफी देर तक वहीं खड़े रहे, जैसे अपने साथी को अंतिम विदाई दे रहे हों।

साथी की मौत के बाद बदल गया झुंड का व्यवहार
डीसी ने कहा कि कुछ समय बाद इस झुंड के व्यवहार में बदलाव देखा गया। मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ीं और बोकारो समेत आसपास के जिलों में कई परिवारों को मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक बेजुबान की मौत केवल एक घटना नहीं होती, बल्कि वह प्रकृति के संतुलन और इंसानों की जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।
कसमार में हिरण की मौत ने फिर उठाए सवाल
हाथी की घटना के कुछ महीनों बाद कसमार प्रखंड के हरनाड गांव में एक हिरण भी खुले कुएं का शिकार हो गया। जंगल से निकला वह हिरण शायद सुरक्षित रास्ते की तलाश में था, लेकिन खुले कुएं ने उसकी जिंदगी छीन ली। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर क्यों ऐसे कुएं खुले छोड़ दिए जाते हैं, जो इंसानों के लिए पानी का स्रोत हैं, लेकिन वन्यजीवों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं।
एक छोटी मुंडेर बचा सकती है किसी जीव की जिंदगी
डीसी ने कहा कि जंगली जानवर इंसानों से लड़ने नहीं आते। वे भी डरते हैं और रात के अंधेरे में शोर व रोशनी से बचते हुए कई बार खुले कुओं को देख नहीं पाते। उन्होंने कहा कि कुएं पर बनी एक छोटी-सी मुंडेर, मजबूत घेरान या सुरक्षित ढक्कन किसी हाथी, हिरण या दूसरे वन्यजीव की जिंदगी बचा सकता है।
गोमिया और पेटरवार में खुले कुओं का होगा सर्वे
प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने गोमिया और पेटरवार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना मुंडेर वाले खुले कुओं का सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया है। इसके बाद ऐसे कुओं को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई भी वन्यजीव ऐसी दुर्घटना का शिकार न हो।
“यह केवल वन्यजीव संरक्षण नहीं, हमारी संवेदना की परीक्षा है”
डीसी अजय नाथ झा ने कहा कि “सुरक्षित कुआं–सुरक्षित वन्यजीव” अभियान केवल वन्यजीवों को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह हमारी संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का अभियान है। उन्होंने कहा कि धरती पर जीने का अधिकार केवल मनुष्यों का नहीं, बल्कि उन सभी जीवों का भी है जो अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते।
DC Bokaro की लोगों से अपील की
“हम ऐसा कोई कुआँ नहीं छोड़ेंगे जो किसी बेजुबान की आख़िरी मंज़िल बन जाए।”
एक मुंडेर बनाएं… एक जीवन बचाएं।
सुरक्षित कुआं–सुरक्षित वन्यजीव।


