Bokaro: बोकारो के सेक्टर-3 में स्थित The Bokaro Mall इन दिनों आसपास रहने वाले लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा परेशानी का कारण बनता जा रहा है। मॉल में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों और PVR Bokaro के दर्शकों की बड़ी संख्या के बीच पार्किंग व्यवस्था का दबाव सीधे आसपास की सड़कों पर दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम होते ही मॉल के सामने और तिराहे के आसपास वाहनों की कतार लग जाती है और सड़क कई बार जाम की स्थिति में पहुंच जाती है। मॉल के सामने और बगल के सड़को पर लोग बेतरकीब तरीके से गाड़ी लगा कर चले जाते है। सड़को पर एक्सीडेंट बढ़ गए है।
मॉल आया, फुटफॉल बढ़ा… लेकिन पार्किंग का इंतजाम कहां है?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब सेक्टर-3 में इतने बड़े व्यावसायिक परिसर के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई, तब भविष्य में यहां आने वाले वाहनों और लोगों की संख्या का पर्याप्त आकलन क्यों नहीं किया गया। मॉल में दुकानों के अलावा मल्टीप्लेक्स भी है। ऐसे में खासकर शाम और सप्ताहांत में फुटफॉल बढ़ जाता है। नतीजा यह है कि पार्किंग की समस्या सिर्फ मॉल परिसर तक सीमित नहीं रहती। सड़क के किनारे खड़े वाहन आसपास के ट्रैफिक को प्रभावित करते हैं और इसका सीधा असर सेक्टर-3 में रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

घर के सामने जाम, कानों में हॉर्न का शोर
सेक्टर-3 के निवासियों की परेशानी सिर्फ ट्रैफिक जाम तक सीमित नहीं है। लोगों का कहना है कि वाहनों के लगातार हॉर्न से आसपास का इलाका noise pollution की चपेट में है। शाम के समय स्थिति और खराब हो जाती है। मॉल के आसपास वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ सड़क पर आवाजाही प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार उन्हें अपने ही इलाके में आने-जाने में परेशानी होती है। सड़को पर दुर्घटना बढ़ गई है।

शिकायतें हुईं, कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने ट्रैफिक पुलिस और DSP Traffic तक अपनी परेशानी पहुंचाई है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। ऐसे में सेक्टर-3 के लोगों का सवाल सीधा है – अगर अव्यवस्थित पार्किंग, वायु प्रदुषण और सड़क जाम शहर की समस्या है, तो मॉल के आसपास की पार्किंग व्यवस्था पर कार्रवाई कब होगी ?
मॉल के पीछे का हिस्सा भी बना नई परेशानी
स्थानीय लोगों का एक और गंभीर आरोप है कि शाम के समय मॉल के पीछे या बगल की सड़को पर वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। आरोप है कि कुछ लोग वहीं गाड़ी में बैठकर शराब का सेवन करते हैं और बाद में सड़क किनारे कचरा छोड़कर चले जाते हैं। यदि यह स्थिति लगातार बनी हुई है तो मामला सिर्फ पार्किंग का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वच्छता, कानून-व्यवस्था और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा से भी जुड़ जाता है।
BSL और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
बोकारो स्टील प्लांट की टाउनशिप में जमीन और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े मामलों में BSL की भूमिका महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर ट्रैफिक प्रबंधन, सड़क पर अवैध-बेतरतीब पार्किंग और सार्वजनिक व्यवस्था जिला प्रशासन व पुलिस के दायरे में आते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि मॉल के बढ़ते फुटफॉल के अनुरूप Traffic Impact Assessment, dedicated parking management, entry-exit plan और peak-hour traffic regulation की व्यवस्था क्यों नहीं की गई ?
समाधान क्या हो सकता है?
स्थानीय लोगों के अनुसार तत्काल तौर पर मॉल के सामने सड़क पर पार्किंग रोकना, peak hours में ट्रैफिक पुलिस की तैनाती, मॉल प्रबंधन से dedicated parking व्यवस्था सुनिश्चित कराना और पीछे और बगल के हिस्से में नियमित निगरानी जरूरी है। इसके साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि मॉल की स्वीकृत पार्किंग क्षमता कितनी है और वास्तविक फुटफॉल के मुकाबले वह पर्याप्त है या नहीं। सेक्टर-3 के लोगों की मांग है कि उन्हें मॉल के खिलाफ नहीं, बल्कि अव्यवस्थित व्यवस्था के खिलाफ समाधान चाहिए।
सेक्टर 3 निवासी विकाश सिंह का कहना है कि मॉल चले, कारोबार बढ़े, लोग खरीदारी करें और मनोरंजन का आनंद लें – लेकिन इसकी कीमत आसपास रहने वाले हजारों लोगों को जाम, हॉर्न, कचरे और असुविधा के रूप में नहीं चुकानी चाहिए।
