Bokaro : वह कुछ सेकंड का मंजर था, लेकिन उसने पूरे बोकारो टाउनशिप को अंदर तक हिला दिया। सेक्टर-12E में जर्जर आवासीय ब्लॉक का हिस्सा अचानक भरभराकर जमीन पर आ गिरा। मलबे की आवाज ने सिर्फ एक इमारत के गिरने की खबर नहीं दी, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों के डर को सामने ला दिया, जो वर्षों से ऐसे ही कमजोर और जर्जर मकानों की छत के नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं।
गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। कोई घायल नहीं हुआ। लेकिन सवाल अब भी खड़ा है—अगली बार भी किस्मत इतनी मेहरबान रहेगी ? यही सवाल अब बोकारो स्टील प्लांट (BSL) प्रबंधन और जिला प्रशासन की नींद उड़ा रहा है। क्योंकि सेक्टर-12E में जो हुआ, वह अकेली घटना नहीं है। टाउनशिप में ऐसे 169 आवासीय ब्लॉक हैं, जिनमें 1,263 क्वार्टरों को वर्ष 2024 में ही Unsafe घोषित किया जा चुका है।

दो साल से ‘Unsafe’, फिर भी आबाद हैं सैकड़ों घर
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन भवनों की खतरनाक स्थिति आज सामने नहीं आई। करीब दो साल पहले ही BSL प्रबंधन ने इन्हें रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया था। इस फैसले तक पहुंचने से पहले भी जांच और सर्वे की लंबी प्रक्रिया चली। BSL ने पहले अपनी आंतरिक समिति बनाकर भवनों की स्थिति का आकलन कराया। रिपोर्ट में हालात चिंताजनक मिलने के बाद विस्तृत सर्वे NBCC से कराया गया। दोनों रिपोर्टों का मिलान करने के बाद 169 ब्लॉकों को Unsafe घोषित किया गया। यानी खतरे की घंटी बहुत पहले बज चुकी थी। लेकिन इन दो वर्षों में खतरा टला नहीं। आज भी बड़ी संख्या में परिवार उन्हीं भवनों में रह रहे हैं।

1,263 में सिर्फ 150 क्वार्टर खाली… बाकी में जिंदगी जारी
उपलब्ध आंकड़े इस संकट की गंभीरता को और भयावह बनाते हैं। 169 असुरक्षित ब्लॉकों के 1,263 क्वार्टरों में से अब तक केवल लगभग 150 क्वार्टर खाली हुए हैं। मतलब, सैकड़ों क्वार्टर अब भी आबाद हैं। इनमें रहने वाले परिवारों के लिए यह सिर्फ एक क्वार्टर नहीं है। यही उनका घर है, उनकी यादें हैं, वर्षों की जिंदगी है। लेकिन दूसरी तरफ उसी घर की दीवारें और छत अब उनकी सुरक्षा पर सवाल बन चुकी हैं। एक तरफ घर छोड़ने का दर्द है, दूसरी तरफ घर में रहने का डर। यही वह मजबूरी है, जिसने समस्या को बेहद जटिल बना दिया है।
आठ सर्कुलर, सात नोटिस… फिर भी नहीं निकले लोग
BSL प्रबंधन ने लोगों को असुरक्षित क्वार्टर खाली करने के लिए अब तक आठ सर्कुलर और सात नोटिस जारी किए हैं। एक बार लीगल नोटिस भी भेजा गया। लेकिन नोटिसों के बावजूद बड़ी संख्या में लोग क्वार्टर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। कुछ लोग कहते हैं कि उनका घर मरम्मत कराकर रहने लायक बनाया जाए। वर्षों से जिस मकान में परिवार पला-बढ़ा, उसे अचानक छोड़ देना उनके लिए आसान नहीं है।
दूसरी ओर वैकल्पिक आवास की समस्या भी सामने है। लोगों की शिकायत है कि जो क्वार्टर शिफ्टिंग के लिए दिए जा रहे हैं, उनमें से कुछ की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कई जगहों पर वैकल्पिक क्वार्टरों में कथित कब्जे की समस्या भी बताई जा रही है। ऐसे में परिवारों के सामने सवाल है—क्या एक असुरक्षित घर छोड़कर दूसरे विवादित या खराब घर में जाना ही समाधान है? सवाल ये भी है कि वैकल्पिक आवास को लेकर यदि लोगों की कुछ शंकायें है भी, तो क्या उचित फोरम पर दोनों पक्ष के बीच पारस्परिक संवाद द्वारा इसका समाधान नहीं निकाला जा सकता?
लाइसेंस वाले 704 क्वार्टर, सहमति सिर्फ 57 की
इन 1,263 क्वार्टरों में 704 क्वार्टर लाइसेंस पर आवंटित हैं। लेकिन वर्ष 2024 से अब तक इनमें से सिर्फ 57 लोगों ने वैकल्पिक क्वार्टर लेकर शिफ्ट होने की सहमति दी है। यह आंकड़ा बताता है कि खतरे की जानकारी होने के बावजूद लोगों को हटाना कितना मुश्किल हो रहा है। एक ओर BSL सुरक्षा को लेकर लगातार निर्देश जारी कर रहा है, दूसरी ओर लोग अपने वर्तमान घर को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस टकराव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जर्जर भवन अचानक गिर पड़ा तो जिम्मेदारी किसकी होगी ?
लीज के 67 क्वार्टर, शिफ्ट होने को तैयार सिर्फ पांच
स्थिति लीज वाले क्वार्टरों में भी अलग नहीं है। Unsafe ब्लॉकों में 67 क्वार्टर लीज पर दिए गए हैं। इनमें से केवल सात क्वार्टरों के निवासियों ने वैकल्पिक आवास में जाने की मंजूरी दी है। बाकी लोग अभी भी वहीं हैं। यानी जिस भवन को BSL खुद Unsafe घोषित कर चुका है, उसकी छत के नीचे आज भी परिवार अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे हैं, बच्चे स्कूल जा रहे हैं, बुजुर्ग घर में हैं और परिवार सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हर गुजरता दिन उनके सिर के ऊपर एक अनदेखा खतरा भी टांग रहा है।
219 क्वार्टरों में BSL कर्मी, 77 ने दिखाई तत्परता
Unsafe ब्लॉकों में 219 क्वार्टर BSL कर्मियों को आवंटित हैं। इनमें से 77 कर्मियों ने दूसरे स्थान पर शिफ्ट होने की तत्परता दिखाई है। बाकी कर्मियों को लेकर BSL प्रबंधन अब अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी में है। उच्च अधिकारियों की मंजूरी मिलना बाकी है। सेक्टर-12E हादसे के बाद माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। अब मामला सिर्फ विभागीय आदेश का नहीं रहा। यह सुरक्षा बनाम लापरवाही का सवाल बन चुका है।
270 क्वार्टर और भी चिंता का कारण
इनके अलावा करीब 270 क्वार्टर प्रशासनिक पूल, स्कूल और अन्य उपयोगों के लिए दिए गए हैं। इन्हें भी खाली कराने को लेकर BSL वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा था। लेकिन इससे पहले कि पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ती, सेक्टर-12E में हादसा हो गया। बीएसएल प्रबंधन इनको भी शिफ्ट कराने को लेकर रेस हो गया है। इस घटना ने साफ कर दिया कि समय अब निकलता जा रहा है।
सवाल यह नहीं कि अगला ब्लॉक कब गिरेगा…
सेक्टर-12E की घटना के बाद सबसे बेचैन करने वाला सवाल यही है कि अगला हादसा कब होगा ? यह कहना मुश्किल है कि कोई जर्जर दीवार कब जवाब दे दे, कोई छत कब भरभराकर गिर पड़े या किसी ब्लॉक का हिस्सा कब जमीन पर आ जाए। इस बार मलबे में सिर्फ ईंट-पत्थर गिरे हैं। कोई इंसान नहीं दबा। लेकिन हर हादसा दूसरी बार चेतावनी देकर नहीं आता। किसी ने ये भी कहा कि जिस तरह झरिया में जमीन के नीचे धधकती आग के ऊपर कई लोग सब जानते हुए भी मकान बना कर रह रहे हैं, कुछ ऐसी ही स्थिति यहाँ भी है. यही वजह है कि अब BSL प्रबंधन और जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ क्वार्टर खाली कराने की नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने की है।
दो साल की चेतावनी अब कार्रवाई मांग रही है
169 ब्लॉक Unsafe घोषित हुए। आठ सर्कुलर निकले। सात नोटिस भेजे गए। लीगल नोटिस तक जारी हुआ। फिर भी 1,263 में से सिर्फ लगभग 150 निवासियों ने क्वार्टर खाली कर दूसरे क्वार्टर में शिफ्ट होने में सहमति जताई । अब सेक्टर-12E की गिरी हुई दीवारें एक सवाल छोड़ गई हैं – क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाए या उससे पहले ही सभी असुरक्षित परिवारों को सुरक्षित छत दी जाए? बोकारो की इन जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों को सिर्फ नोटिस नहीं चाहिए। उन्हें सुरक्षित घर चाहिए। उधर बीएसएल सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन ने पहले ही इसकी पहल कर दी है और दो साल से लगातार प्रभावित लोगों की दूसरे सुरक्षित क्वार्टर में शिफ्टिंग के लिए प्रयासरत है, पर आवासधारी ही इसके लिए सहमत नहीं हो रहे जिससे आज ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है. क्योंकि जब सिर के ऊपर छत ही खतरा बन जाए, तब घर की कीमत नहीं, जिंदगी की कीमत सबसे बड़ी होती है।
