Bokaro Steel Plant (SAIL) Hindi News

Bokaro Steel Plant के अंदर चेन्नई की कंपनी लगाएगी प्लांट, हो गया MOU, स्लैग के पहाड़ बेचकर करोड़ो की कमाई


Bokaro: शहर के सेक्टर 9 इलाके के महुआर में बीएसएल द्वारा डंप किया गया पहाड़ीनुमा स्लैग का विशाल भंडार है। जिसको ख़त्म करने की कवायद बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने शुरू कर दी है। बीएसएल के पास पिछले कई दशकों से जमा करीब 1 करोड़ टन एलडी स्लैग का विशाल भंडार है। जो प्लांट के बगल में छोटी-छोटी पहाड़ियों का स्वरुप ले चूका है।

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प्लांट के कचरे से बनेगा सेमी-कंडक्टर
इसके आलावा, बीएसएल प्लांट के स्टील उत्पादन में रोजाना करीब 1500 टन एलडी स्लैग निकल रहा है। देश भर में हो रहे नित नए रीसर्च ने स्टील प्लांट के इस कचरे को उपयोगी बना दिया है। इस एलडी स्लैग में सिलिकॉन ऑक्साइड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। पावर (बिजली) सेक्टर से जुड़ी सेमी कंडक्टर बनाने वाली कंपनियों के लिए यह सिलिकॉन महत्वपूर्ण रॉ मटेरियल है, जिसके लिए उनको दूसरे देशो पर निर्भर पर रहना पड़ता है।

Bokaro Steel Plant कमायेगा करोड़ो
बीएसएल प्लांट अब न सिर्फ बेकार पड़े स्लैग के इस विशाल भंडार को ख़त्म करेगा, बल्कि देश भर के सेमी-कंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को उनका रॉ मटेरियल सिलिकॉन कार्बाइड सप्लाई कर करोड़ो कमायेगा। बाजार में इलेक्ट्रिक से चलने वाले वाहन आने के साथ सेमी-कंडक्टर की डिमांड काफी बढ़ गई है। इसके लिए बीएसएल प्रबंधन ने चेन्नई के एक कंपनी से साथ एमओयू किया है। जो बीएसएल प्लांट के अंदर एलडी स्लैग से सिलिकॉन निकालने वाला एक छोटा सा प्लांट लगाएगी। इस प्लांट को लगाने में आने वाला करोड़ो रूपये का निवेश चेन्नई की कंपनी करेगी।

BSL, चीफ ऑफ़ कम्युनिकेशन, मणिकांत धान के अनुसार
सेल, बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) ने स्लैग को मूल्य वर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए राम चरण कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (RCPL), चेन्नई के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौता ज्ञापन पर एमडी, आरसीपीएल कौशिक पालीचा और सीजीएम (मेंटेनेंस) बीएसएल पी.के.बैसाखिया ने बीएसएल के कार्यकारी निदेशक (वर्क्स) बी.के.तिवारी और जीएम (ईसीएस) नवीन प्रकाश श्रीवास्तव की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

स्लैग का निपटान बहुत बड़ी चुनौती
स्टील स्लैग इस्पात उत्पादक संयंत्रों में प्राप्त एक प्रमुख उप-उत्पाद है। इस ठोस अपशिष्ट का निपटान एक बहुत बड़ी चुनौती भी है। हालांकि स्टील स्लैग को ठोस अपशिष्ट माना जाता है, लेकिन इसमें कई मूल्यवान तत्व भी होते हैं जैसे कि टाइटेनियम, निकेल, जिंक, आयरन, एल्यूमीनियम, सिलिका आदि। इन तत्वों या यौगिकों को जब रासायनिक या भौतिक प्रक्रिया द्वारा निकाला जाता है तो अनुप्रयोगों के विभिन्न क्षेत्रों के लिए मूल्यवर्धन होता है।

कचरे को मूल्य वर्धित उत्पादों में बदलने की तकनीक
आरसीपीएल (RCPL) के पास इन कचरे को मूल्य वर्धित उत्पादों में बदलने की तकनीक है। चूंकि SiO2 (सिलिकॉन डाइऑक्साइड) स्टील स्लैग का प्रमुख घटक है, इसलिए Si या SiC (सिलिकॉन कार्बाइड) वेफर्स निकालने के लिए स्लैग में सिलिका सामग्री को इलेक्ट्रो-रासायनिक रूप से कम किया जाता है, जो सेमी कंडक्टर उद्योग के लिए एक इनपुट सामग्री है।

प्लांट के अंदर लगेगी मॉड्यूलर इकाई
इस समझौता ज्ञापन के तहत, सेल-बीएसएल और मेसर्स आरसीपीएल ने स्लैग को मूल्य वर्धित उत्पादों (वीएपी) में बदलने के लिए 50टीपीडी की आरसीपीएल द्वारा डिजाइन की गई पायलट स्केल मॉड्यूलर इकाई स्थापित करने पर पारस्परिक रूप से सहमति व्यक्त की है। इसके बाद, यदि आउटपुट संतोषजनक है, तो सेल-बीएसएल दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों के अधीन, 100 टीपीडी से 500 टीपीडी तक की क्षमता वाले रिएक्टर बनाने के लिए आरसीपीएल को ऑर्डर दे सकता है।

BSL के पास एलडी स्लैग का विशाल भंडार
विशेष रूप से, एलडी स्लैग का उपयोग इस्पात उद्योगों में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बीएसएल के पास एलडी स्लैग का विशाल भंडार है, जिसका उपयोग इस एमओयू के माध्यम से लाभप्रद रूप से किया जा सकता है। वर्तमान में, सेमी-कंडक्टर उद्योग में उपयोग के लिए सिलिकॉन कार्बाइड को ज्यादातर उच्च लागत पर आयात किया जाता है। बीएसएल की यह पहल न केवल संभावित रूप से अपशिष्ट निपटान की चुनौती को कम करेगी, बल्कि यदि पायलट परीक्षण सफल रहा, तो इससे एलडी स्लैग उपयोग के क्षेत्र में पूरी तरह से नए रास्ते खुल जाएंगे।


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