Bokaro: बोकारो में पेट्रोल-डीजल के अवैध भंडारण का कारोबार किस तरह बेखौफ चल रहा है, इसकी तस्वीर शनिवार सुबह जरीडीह में फिर देखने को मिली। फोरलेन किनारे स्थित एक गोदाम में तेल से भरे ड्रम धू-धू कर जलते रहे, आग की लपटें निकलती रहीं और दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई।
वैध या अवैध ?
गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। लेकिन इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस की जानकारी और निगरानी व्यवस्था पर खड़ा हो गया है। जिस गोदाम में हजार लीटर से ज्यादा पेट्रोल-डीजल रखे होने की बात सामने आई, उसके बारे में पुलिस का कहना है कि फिलहाल वो पता लगा रहे है कि गोदाम ‘वैध’ है या ‘अवैध’। थाना प्रभारी के मुताबिक, गोदाम किसका है, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।

उठ रहे कई सवाल ?
पुलिस का यह जवाब अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। आखिर जिले में पेट्रोलियम पदार्थों का इस तरह भंडारण किसकी निगरानी या अनुमति से हो रहा था ? क्या पुलिस-प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं थी ? और अगर जानकारी नहीं थी, तो ऐसे संवेदनशील ठिकाने पुलिस की नजर से कैसे बचते रहे ?

मची रही अफरा-तफरी
घटना की सूचना मिलते ही जरीडीह थाना प्रभारी विपिन चंद्र महतो मौके पर पहुंचे और अग्निशमन विभाग को सूचना दी। दमकल की एक गाड़ी ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गोदाम में रखे पेट्रोल-डीजल के अलावा टंकी और अन्य सामान जलकर खाक हो गए। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है।
आग लगते ही गोदाम का मालिक और स्टाफ भाग …
बोकारो अग्निशमन विभाग के प्रभारी भगवान ओझा ने बताया, “जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो तेल से भरे ड्रमों में आग लगी हुई थी। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। घटना के समय गोदाम का मालिक और वहां काम करने वाले लोग मौके से गायब थे। स्थानीय लोगों के माध्यम से उन्हें बुलाने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सामने नहीं आया। गोदाम में 1000 लीटर से ज्यादा का भंडारण था.”
मालिक गायब, पुलिस को गोदाम के मालिक का पता नहीं!
हैरानी की बात यह है कि आग की इतनी बड़ी घटना के बावजूद गोदाम के मालिक की पहचान और वहां पेट्रोल-डीजल के भंडारण की वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। थाना प्रभारी विपिन चंद्र महतो ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “गोदाम किसका है, इसकी जानकारी नहीं है। मालिक की ओर से थाने में कोई लिखित शिकायत भी नहीं दी गई है। हम मामले का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।”
मई से नवंबर तक, अवैध ईंधन कारोबार का खतरनाक नेटवर्क
यह इस साल बोकारो में अवैध ईंधन भंडारण से जुड़ी दूसरी बड़ी आग की घटना है। इससे पहले 14 मई को सेक्टर-12 थाना क्षेत्र में एनएच-23 किनारे एक अवैध पेट्रोल-डीजल भंडारण केंद्र में भीषण आग लगी थी। इसके बाद दूसरी बार अवैध भंडारण का मामला तब सामने आया जब 29 जून को एसडीओ चास प्रांजल ढाढ़ा के नेतृत्व में संयुक्त छापेमारी में सेक्टर-12 और बालीडीह थाना क्षेत्रों के तीन अवैध डिपो से 8,000 लीटर से अधिक इथेनॉल व उससे मिलते-जुलते पदार्थ तथा 1,200 लीटर से अधिक पेट्रोल जब्त किया गया था।
जांच में एक संगठित नेटवर्क की आशंका सामने आई थी। सूत्रों के मुताबिक, बालिडीह स्थित BPCL और HPCL के आधिकारिक डिपो से ईंधन लेकर निकलने वाले कुछ टैंकरों द्वारा रास्ते में कथित तौर पर तेल की खेप अवैध डिपो में उतारी जाती थी। सवाल सिर्फ आग का नहीं, प्रशासनिक निगरानी का भी है। मई में आग, जून में हजारों लीटर ईंधन की जब्ती और अब नवंबर में फिर वही मंजर ! आखिर जिले में अवैध पेट्रोल-डीजल का कारोबार किसकी निगरानी में फल-फूल रहा है? क्या किसी बड़े हादसे और जानमाल के नुकसान के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी ?
