Bokaro: बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) एवं अखिल भारतीय चेतना दर्पण के संयुक्त तत्वावधान में सेक्टर-5 स्थित बोकारो इस्पात पुस्तकालय में मासिक कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर के वरिष्ठ एवं युवा कवियों तथा साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से साहित्यिक माहौल को जीवंत कर दिया।

सामाजिक सरोकार और समसामयिक विषयों पर रचनाओं ने बांधा समां
कवि-गोष्ठी में साहित्यकारों ने सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रभावना और समसामयिक विषयों को केंद्र में रखकर विविध रचनाएं प्रस्तुत कीं। कविताओं के भाव, संवेदना और प्रभावशाली अभिव्यक्ति ने उपस्थित श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के औपचारिक स्वागत और सरस्वती वंदना “हे मां शारदे वीणावादिनी” के साथ हुई। इसके बाद एक-एक कर कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। विविध भावों और अलग-अलग काव्य शैलियों से सजी प्रस्तुतियों ने पुस्तकालय परिसर को साहित्यिक एवं प्रेरणादायी वातावरण से भर दिया।

कवियों ने पेश कीं विविध भावों से सजी रचनाएं
गोष्ठी में कस्तूरी सिन्हा ने “क्या कहूँ क्या से क्या हो गए”, अनिल कुमार श्रीवास्तव ने “पश्चाताप”, क्रांति श्रीवास्तव ने भोजपुरी कविता “केतना कुछ छूट गईल नईहरा के दुआरे” और काजल भलोटिया ने “कविता क्या होती है” प्रस्तुत की।
देश, समाज और जीवन के विविध रंगों पर हुई काव्य प्रस्तुति
कनक लता राय ने “दैहिक दैविक भौतिक तापा”, नीलम झा ने “धरती की पुकार”, पद्मावति कोमल ने “जंतर मंतर पर युवाओं की आवाज”, ऋचा प्रियदर्शिनी ने “इस्पात संयंत्र के कर्मी” और डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने “सफलता के सोपान” रचना प्रस्तुत की।
राष्ट्रभावना से ओतप्रोत रचनाओं ने भी मोहा मन
शैलजा झा की “रंग”, पंकज प्रेमी की “मेरा भारत देश महान”, विजय शंकर मलिक की “गाओ स्वदेश जयगाथा” तथा अमृता शर्मा की “पौ बारह शकुनियों के” जैसी रचनाओं ने भी श्रोताओं की सराहना बटोरी। इन प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में साहित्य के साथ राष्ट्रभावना और सामाजिक चेतना का भी प्रभाव देखने को मिला।
साहित्यिक गतिविधियों के लिए मजबूत मंच बताया गया
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मासिक कवि-गोष्ठी को साहित्यिक गतिविधियों और वैचारिक आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच बताया। उन्होंने कहा कि कवियों एवं साहित्यकारों को नियमित रूप से मंच मिलने से नगर में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ती है और समाज में रचनात्मक एवं सकारात्मक चेतना को मजबूती मिलती है।
रचनाओं की भाव और शिल्प के आधार पर हुई समीक्षा
गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं के भाव, शिल्प, विषयवस्तु और अभिव्यक्ति के आधार पर सारगर्भित समीक्षा भी की गई। साहित्यकारों ने रचनाओं के विभिन्न पक्षों पर विचार साझा करते हुए साहित्यिक संवाद को आगे बढ़ाया।
कला और साहित्य को बढ़ावा देने की दिशा में पहल
मासिक कवि-गोष्ठी की यह पहल बीएसएल की कला, साहित्य और सामुदायिक चेतना को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। ऐसे रचनात्मक मंच स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी बात रखने का अवसर देने के साथ-साथ इस्पात नगरी में सकारात्मक संवाद, बौद्धिक ऊर्जा और सांस्कृतिक सहभागिता को भी नई गति प्रदान करते हैं।
