बोकारो में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाएं अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) इंडिया की एक रिपोर्ट में झारखंड के बोकारो और धनबाद को देश के संभावित गैर-तटीय ग्रीन हाइड्रोजन हब के लिए उपयुक्त स्थानों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक बोकारो में गैस पाइपलाइन नेटवर्क, जल संसाधन, पर्याप्त पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टील समेत बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं की मौजूदगी इसे ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए अनुकूल बनाती है।

बोकारो की औद्योगिक ताकत बनी आधार
रिपोर्ट के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए अब तक तटीय क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलती रही है, क्योंकि वहां पानी और बंदरगाहों की उपलब्धता के कारण उत्पादन और निर्यात दोनों में सुविधा होती है। हालांकि, WRI इंडिया के आकलन में बोकारो जैसे अंतर्देशीय औद्योगिक जिलों में भी बिजली, पानी, गैस पाइपलाइन और औद्योगिक मांग का ऐसा संयोजन मौजूद है, जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को व्यवहारिक बना सकता है।
स्टील उद्योग से मिल सकती है बड़ी मांग
बोकारो में बड़े पैमाने पर स्टील उद्योगों – बोकारो स्टील प्लांट, ईएसएल स्टील, सुंदरम स्टील, बीएमडब्ल्यू स्टील आदि – की मौजूदगी ग्रीन हाइड्रोजन के लिए संभावित घरेलू बाजार तैयार करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाइड्रोजन की मांग वाले उद्योगों के साथ गैस पाइपलाइन, जल स्रोत और पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता बोकारो की स्थिति को मजबूत बनाती है।

2030 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक भारत को वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने और सालाना 50 लाख टन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। 2026 की शुरुआत तक देश में ग्रीन हाइड्रोजन की स्थापित क्षमता करीब 8,000 टन बताई गई थी। गुजरात के बाद कर्नाटक और हरियाणा में इसकी प्रमुख क्षमता मौजूद है।
धनबाद भी संभावित केंद्र
झारखंड में बोकारो के साथ धनबाद को भी ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयुक्त माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक धनबाद की स्थिति जलविद्युत परियोजनाओं से निकटता, सतही जल की उपलब्धता और औद्योगिक उपभोक्ताओं की मौजूदगी के कारण मजबूत है।
WRI इंडिया ने बताई बोकारो की ताकत
WRI इंडिया के हाइड्रोजन कार्यक्रम के प्रमुख अनुराग नल्लापनेनी के अनुसार राजस्थान के कोटा में उर्वरक उद्योग, जलविद्युत उत्पादन और जल स्रोतों के साथ नजदीकी गैस पाइपलाइन इसकी क्षमता बढ़ाते हैं। इसी तरह झारखंड का बोकारो गैस पाइपलाइन नेटवर्क, जल संसाधन, पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क और औद्योगिक उपभोक्ताओं की मौजूदगी के कारण महत्वपूर्ण संभावित केंद्र है।
कई गैर-तटीय शहरों की भी पहचान
रिपोर्ट में झारखंड के अलावा पंजाब के भटिंडा और मोगा, राजस्थान के कोटा, मध्य प्रदेश के खंडवा और खरगोन तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर को भी संभावित गैर-तटीय ग्रीन हाइड्रोजन केंद्रों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे कई स्थान क्षेत्रीय क्लस्टर के रूप में विकसित हो सकते हैं, जहां एक ही जिले या आसपास के इलाकों में उत्पादन के लिए जरूरी अलग-अलग संसाधन उपलब्ध हैं।
तटीय शहर भी रहेंगे अहम
ग्रीन हाइड्रोजन नेटवर्क में तटीय राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम, महाराष्ट्र के मुंबई, ओडिशा के अंगुल और पारादीप, तमिलनाडु के चेन्नई तथा कर्नाटक के गडग, कोप्पल और मंगलुरु को संभावित केंद्र बताया गया है। इन स्थानों की खासियत बंदरगाहों के साथ-साथ हाइड्रोजन की खपत करने वाले उद्योगों और गैस पाइपलाइन नेटवर्क की उपलब्धता है।
