Bokaro: बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र में संचालित सुंदरम स्टील प्राइवेट लिमिटेड के विस्तारीकरण, नए फेरो अलाय प्लांट और पावर प्लांट की स्थापना को लेकर गुरुवार को हुई पर्यावरणीय जनसुनवाई में ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ शिकायतों की झड़ी लगा दी। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जियाडा के बोकारो क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में आयोजित सुनवाई में आसपास के गांवों से पहुंचे लोगों ने प्रदूषण, स्वास्थ्य, जलस्रोत, कृषि भूमि, रोजगार और सीएसआर को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

प्रभावित गांवों के बजाय जियाडा परिसर में जनसुनवाई पर सवाल
ग्रामीणों ने सबसे पहले जनसुनवाई के स्थान पर ही सवाल खड़ा किया। उनका कहना था कि परियोजना से प्रभावित गांवों के बीच सुनवाई कराने के बजाय जियाडा परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने से वास्तविक प्रभावित लोगों की भागीदारी सीमित रह गई। ग्रामीणों ने कहा कि जिन गांवों की जमीन, पानी, खेती और स्वास्थ्य पर परियोजना का असर पड़ना है, वहां अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर जनसुनवाई होनी चाहिए थी।
‘विस्तार से पहले मौजूदा प्रदूषण का हिसाब दें’
ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी के मौजूदा संयंत्र से ही आसपास के इलाकों में प्रदूषण की शिकायतें हैं। ऐसे में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की क्षमता और उनकी वास्तविक कार्यशीलता की जांच कराने की मांग की।

उन्होंने उत्सर्जन, अपशिष्ट प्रबंधन और जल खपत से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने को कहा। ग्रामीणों का कहना था कि पर्यावरणीय मानकों की जांच केवल कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि स्थल निरीक्षण के माध्यम से होनी चाहिए।
स्वास्थ्य और जलस्रोतों पर असर की जांच की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि औद्योगिक गतिविधियों के कारण धूलकण और अन्य प्रदूषणकारी तत्वों का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जलस्रोतों और कृषि भूमि पर पड़ने वाले प्रभाव का भी स्वतंत्र अध्ययन कराने की मांग की गई। ग्रामीणों ने कहा कि मौजूदा संयंत्र से जुड़ी शिकायतों का समाधान और वर्तमान पर्यावरणीय स्थिति स्पष्ट किए बिना विस्तारीकरण को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।
गांवों से दूरी के नियमों का भी उठा मुद्दा
जनसुनवाई में स्पंज आयरन संयंत्रों की आबादी से दूरी से जुड़े प्रावधानों का मुद्दा भी उठा। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने दावा किया कि आबादी वाले गांवों के नजदीक ऐसे उद्योगों की स्थापना को लेकर निर्धारित मानक हैं, लेकिन बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र में कई उद्योग इन प्रावधानों के बावजूद संचालित हो रहे हैं।
अनु प्रसाद ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ग्रीन बुक में स्पंज आयरन उद्योगों के लिए निर्धारित प्रावधानों का हवाला देते हुए अधिकारियों से उसी के अनुरूप अनुमति देने की मांग की। ग्रामीणों ने सुंदरम स्टील सहित संबंधित उद्योगों की स्थापना और विस्तार की अनुमति की स्वतंत्र जांच तथा स्थल निरीक्षण की मांग की।
चारदीवारी से सटे गांव के लोगों ने बताई परेशानी
सुंदरम स्टील की चारदीवारी से सटे बारुडीह गांव के ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। उनका कहना था कि उद्योग स्थापित होने के समय रोजगार और विकास की उम्मीद थी, लेकिन समय के साथ समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ती गईं।
ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना का आकलन केवल कंपनी के दस्तावेजों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। अधिकारियों को प्रभावित गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए और मौजूदा संयंत्र से जुड़ी शिकायतों की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।
CSR के खर्च का गांववार हिसाब मांगा
जनसुनवाई में कंपनी के सीएसआर कार्यों को लेकर भी सवाल उठे। सचिन महतो ने मांग की कि कंपनी अपने सीएसआर फंड के खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करे। उन्होंने पूछा कि किन गांवों में कितनी राशि खर्च की गई, किन योजनाओं पर खर्च हुआ और उसका वास्तविक लाभ कितने लोगों को मिला।
नरंकारा मुखिया बबीता कुमारी ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में सीएसआर कार्य किए बिना घर-घर जाकर लोगों से हस्ताक्षर कराकर कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों ने स्कूल, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर खर्च की गई सीएसआर राशि का गांववार विवरण सार्वजनिक करने के साथ योजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की।
रोजगार के नाम पर स्थानीय युवाओं को क्या मिला?
जनसुनवाई में स्थानीय रोजगार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। आजसू पार्टी के बोकारो जिलाध्यक्ष सचिन महतो ने कहा कि किसी उद्योग के विस्तार का पहला लाभ आसपास के लोगों को रोजगार के रूप में मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के बजाय श्रमिक या सामान्य कामों तक सीमित रखा जाता है।
उन्होंने मांग की कि विस्तार से पहले कंपनी यह स्पष्ट करे कि वर्तमान में कितने स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है और विस्तार के बाद कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। गोडाबाली दक्षिणी पंचायत के पूर्व मुखिया गणेश ठाकुर ने कहा कि किसी कंपनी की स्थापना के समय आसपास के ग्रामीण रोजगार की उम्मीद करते हैं, लेकिन बियाडा क्षेत्र की अधिकांश कंपनियों में स्थानीय युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं।
‘विकास चाहिए, लेकिन जीवन की कीमत पर नहीं’
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे उद्योग या विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन स्वास्थ्य और पर्यावरण की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने विस्तारीकरण से पहले प्रभावित गांवों का सामाजिक और पर्यावरणीय अध्ययन कराने, जलस्रोतों की सुरक्षा, कृषि भूमि पर प्रभाव, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों, उत्सर्जन और अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
सचिन महतो ने कहा कि कंपनी को विस्तार चाहिए तो पहले स्थानीय लोगों का विश्वास जीतना होगा। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी आपत्तियों और सुझावों को जनसुनवाई के अभिलेख में शामिल कर उनका समाधान किया जाना चाहिए।
ये मांगें प्रमुखता से उठीं
- विस्तारीकरण से पहले स्वतंत्र पर्यावरणीय जांच।
- वर्तमान प्रदूषण और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की कार्यशीलता की जांच।
- प्रभावित गांवों में स्थल निरीक्षण और वास्तविक पर्यावरणीय स्थिति की रिपोर्ट।
- उत्सर्जन, अपशिष्ट प्रबंधन और जल खपत के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
- सीएसआर योजनाओं का भौतिक सत्यापन।
- सीएसआर खर्च का गांववार पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- स्थानीय युवाओं के लिए स्थायी रोजगार का स्पष्ट प्रावधान।
- परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय दस्तावेज ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जाएं।
- वर्तमान संयंत्र से जुड़ी पुरानी शिकायतों का समाधान होने के बाद ही विस्तार पर निर्णय लिया जाए।
जनसुनवाई में प्रदूषण बोर्ड के अंचल पदाधिकारी विवेक कुजूर, अपर समाहर्ता सुनील चंद्रा, चास बीडीओ प्रदीप कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
