उड़ान से पहले ही जमीन पर बैठा सपना
Bokaro: बोकारो एयरपोर्ट की उड़ान फिलहाल आसमान में नहीं, फाइलों में अटकी हुई है। जनवरी 2026 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (AAI) और बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के बीच बोकारो एयरपोर्ट को लेकर हुए एमओयू की अवधि खत्म हो गई, लेकिन चार महीने बाद भी उसका नवीनीकरण नहीं हो सका। दूसरी तरफ, करोड़ों रुपये के बकाया भुगतान पर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और बोकारो स्टील लिमिटेड (BSL) के बीच ऐसा पेंच फंसा है कि परियोजना रनवे पर आने से पहले ही प्रशासनिक जाम में खड़ी नजर आ रही है।
कागजों में सब कुछ तैयार बताया जा रहा है, बस समझौता नहीं है, फंड नहीं है, जिम्मेदारी तय नहीं है, रखरखाव नहीं है… और हां, उड़ान भी नहीं है।

बकाया भुगतान का हिसाब, मेंटेनेंस पर विराम
सूत्रों के अनुसार, 2024 तक AAI ने एयरपोर्ट के रखरखाव (Maintenance of Civil+Electrical+Mechnical+Housekeeping) पर 3 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। बाद में यह राशि के भुगतान के लिए बीएसएल को बिल भेजा गया। भुगतान अब तक नहीं हुआ। AAI कि नजर में ये राशि बीएसएल पर आउटस्टैंडिंग है। और वह बीएसएल प्रबंधन को पत्र भेजकर उसका भुगतान करने के लिए कई बार कह चूका है, पर बीएसएल वह राशि नहीं दे रहा।
AAI का कहना है कि बिना बकाया राशि मिले और बिना वैध MOU के आगे मेंटेनेंस संभव नहीं। यानी एयरपोर्ट की मशीनें और संरचनाएं अब इंतजार की स्थिति में हैं-जैसे उन्हें भी किसी मंजूरी का इंतजार हो।
70 करोड़ का ढांचा, लेकिन देखभाल भगवान भरोसे
करीब 70 करोड़ रुपये की लागत से बने बोकारो एयरपोर्ट में बैगेज स्क्रीनिंग सिस्टम, मेटल डिटेक्टर, एयर कंडीशनर, सीसीटीवी कैमरे और टर्मिनल बिल्डिंग जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन नियमित मेंटेनेंस न होने से इनकी हालत धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है।
तकनीकी विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी मशीनों को पीरियॉडिक सर्विसिंग चाहिए। लेकिन यहां सर्विसिंग से ज्यादा सर्वाइवल की जरूरत दिख रही है।

जिम्मेदारी किसकी? यही सबसे बड़ा सवाल
AAI का कहना है कि एमओयू के अनुसार एयरपोर्ट के रखरखाव का खर्च बीएसएल को वहन करना चाहिए। वहीं बीएसएल का तर्क है कि जब तक एयरपोर्ट का औपचारिक हैंडओवर ही नहीं हुआ, तब तक वह इसकी जिम्मेदारी कैसे स्वीकार करे ?
यानी एयरपोर्ट बनकर खड़ा है, मशीनें लगी हैं, भवन तैयार है… लेकिन मालिकाना और जिम्मेदारी पर अभी भी बहस जारी है।
लाइसेंस, सर्वे और अधूरे काम
DGCA लाइसेंस से पहले BCAS का सुरक्षा सर्वे हुआ, जिसमें कई कमियां उजागर हुईं। उन्हें ठीक करने के निर्देश दिए गए, लेकिन कई कार्य अब तक अधूरे हैं। जिला प्रशासन ने कई बैठकें कीं, डेडलाइन दी, निर्देश जारी किए-लेकिन नतीजा वही। जिला प्रसाशन के हिस्से के जो आवश्यक कार्य शेष हैं – जैसे एम्बुलेंस की उपलब्धता, फायर ब्रिगेड की व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती, अतिक्रमण हटाओ और सतनपुर पहाड़ पर लाइटिंग, वे अब तक धरातल पर नजर नहीं आए हैं। तैयारियों को लेकर स्थिति ऐसी है कि सब कुछ “लगभग तैयार” या “तुरंत हो जाएगा” के दायरे में ही अटका हुआ है। कुछ प्रसाशनिक अधिकारियों का मानना है कि ये सब कब काम तुरंत हो जाने वाला है। मुश्किल से 15 दिन से 1 महीने में ये काम सब पूरा हो जायेगा, पहले उधर से कुछ तो हो।
जनता का सवाल: उड़ान कब ?
धनबाद में एयरपोर्ट निर्माण की चर्चा और सांसद Dhulu Mahto के बयान के बाद बोकारो में बेचैनी बढ़ गई है। लोगों को डर है कि कहीं उनका एयरपोर्ट सपना कागजों में ही सीमित न रह जाए।
बोकारोवासियों के लिए यह सिर्फ एयरपोर्ट नहीं, विकास की उम्मीद है। लेकिन फिलहाल यह उम्मीद MOU, बकाया और जिम्मेदारी की बहस में रनवे खोज रही है।

