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राउरकेला के तर्ज पर क्या BGH को अपोलो या किसी प्राइवेट ग्रुप को सौंपना चाहिए ? पढ़िए क्या कहते है बोकारो के…..


Bokaro: राउरकेला इस्पात संयंत्र द्वारा जनहित में अपने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का संचालन अपोलो हॉस्पिटल्स के सुपुर्द करना चर्चे में है. बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) के चिकित्सा व्यवस्था से दुखी यहां के अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि, बीएसएल (BSL) क्यों नहीं जनहित और कर्मचारियों का हित देखते हुए ऐसा ही कदम उठा रहा है ?

जनप्रतिनिधि हो या यूनियन लीडर या फिर आम जनता सभी राउरकेला प्रबंधन की तुलना बीएसएल से कर रहे है. इस कदम के लिए सेल की चेयरमैन, सोमा मंडल और राउरकेला इस्पात संयंत्र के डायरेक्टरेट इंचार्ज अतनु भौमिक की तारीफ बोकारो में खूब हो रही है. भौमिक पहले बीएसएल में इडी वर्क्स रह चुके हैं.

लोग कह रहे हैं जिस तरह सेल ने अपनी नीति में संशोधन करते हुए जनहित में बड़ा फैसला लिया गया है, वह काबिले तारीफ है. बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) प्रबंधन को भी इसी राह में आगे चलकर बोकारो जनरल अस्पताल का संचालन किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल को दे देना चाहिए. बता दें, राउरकेला प्रबंधन और अपोलो हॉस्पिटल्स के बीच मंगलवार को अस्पताल संचालन को लेकर एग्रीमेंट हुआ है. इस कदम के बाद बोकारो के लोगो में भी कुछ आस बंधी है.

BGH को प्राइवेट हाथों में देना चाहिए की नहीं ?
इस बात पर विचार करने के पहले यह जान लें कि बीजीएच में आने वाले मरीजों में 70% प्राइवेट मरीज होते है और 30% बीएसएल (SAIL-BSL) के कर्मचारी और उनके आश्रित. बता दें, बीजीएच में सुपर-स्पेशलिस्ट की भयंकर कमी है। 16 विभागों में सिर्फ 3 विभाग में हे सुपर-स्पेशलिस्ट है. जिस कारण करीबन 135 डॉक्टर रहते हुए भी मरीजों को तुरंत रेफेर कर दिया जा रहा है.

प्राइवेट मरीजों को छोड़कर, अगर सिर्फ 30% बीएसएल के कर्मचारी और उनके आश्रितों के रेफेर किये जाने की बात करें तो आकड़ा चौंकाने वाला है. पिछले तीन सालों में (2019 -2021) बीजीएच ने 2,850 कर्मचारियों और उनके आश्रित मरीजों को बाहर के अस्पतालों में रेफेर किया है. जिनके इलाज में 36 करोड़ रुपये खर्च हुए है। वह भी तब जब कोरोनाकाल है और कई महीने लॉक डाउन रहा। सामान्य दिनों में यह आकड़ा और भी ज्यादा होता.

बीजीएच का शायद ही कोई ऐसा विभाग है, जहां से मरीज बाहर के अस्पतालों में रेफेर नहीं किये गए है. पर इनमे से सबसे ज्यादा मरीज कार्डियोलॉजी विभाग और सबसे कम कैंसर विभाग से हुए है. सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2019 से लेकर 2021 तक अकेले कार्डियोलॉजी विभाग से 516 मरीजों को बाहर के अस्पतालों में रेफेर किया गया है. या कहें कि पुरे बीजीएच में कार्डियोलॉजी विभाग ने ही सबसे अधिक 7.20 करोड़ रुपये मरीजों को बाहर के अस्पतालों में रेफेर करके खर्च किया है.

इसके बाद ऑर्थोपेडिक्स (हड्डी) विभाग ने 419 मरीजों को रेफेर कर 5.94 करोड़ रूपये खर्च किये है. इनमे 649 मिक्स्ड केसेस (दो या कई बीमारियों) के मरीज रेफेर किये गए है जिनमे 9.78 करोड़ खर्च हुआ है. यह सभी मरीज बीएसएल कर्मचारी और उनके आश्रितों ही है. इसी तरह ओफ्थल्मोलॉजी (नेत्र) विभाग से 285 मरीज बाहर रेफेर हुए है, जिनपर खर्च करीब 4.3 करोड़ रूपये हुआ है. यह आकड़े चौंकाने वाले है। आइए देखें बोकारो के माननीयो और विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों ने बीजीएच का संचालन अपोलो जैसे नामी अस्पताल के हाथों में देने को लेकर क्या कहा :

झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस की महासचिव और प्रत्याशी रहीं स्वेता सिंह ने BGH के मुद्दे को लेकर डायरेक्टर इंचार्ज से की मुलाकात –

मैंने डायरेक्टर इंचार्ज से मिलकर कहा कि BSL कर्मचारी और यह के लोग लगातार बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर शिकायत रही है. अधिकतर लोग मज़बूरी में बोकारो जनरल अस्पताल की जगह रांची सहित दूसरे शहरों में जा कर अपना इलाज करवा रहे हैं. यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधार की बहुत जरूरत है. इसके लिए राउरकेला स्टील प्लांट की तर्ज पर बोकारो में किसी बड़े हॉस्पिटल के साथ अनुबंध किया जाना चाइये ताकि यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर हो सके.

राउरकेला के तर्ज पर BGH को बड़े अस्पताल समूह को दें: बोकारो विधायक बिरंची नारायण

विधायक ने BSL के डायरेक्टर इंचार्ज को लिखा पत्र कहा कि बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) द्वारा संचालित बोकारो जनरल अस्पताल (BGH) में विगत कुछ वर्षों से सुविधाओं और रख-रखाव में गिरावट होते आ रही है. बेहतर चिकित्सा सेवा न मिलने के कारण संयंत्र के वर्तमान कर्मियों के अतिरिक्त पूर्व कर्मियों एवं बोकारो सहित आस – पास के जिलों के आम नागरिकों में निराशा और हताशा है.  अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों , पारा मेडिकल स्टाफ , तकनीशियन , नर्स , सफाई कर्मी आदि का घोर आभाव है . लोगों का विश्वास टूटता जा रहा है .

यहाँ से प्रति वर्ष करोड़ों रूपये referred मरीजों के इलाज के लिए देश भर के दूसरे अस्पतालों में भेजने पड़ते हैं । वर्तमान समय में सेल के राउरकेला इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा राउरकेला अस्पताल का संचालन का जिम्मा अपोलो इंडिया को सौपा गया है. उससे बोकारो जनरल अस्पताल के बेहतरी की आस जगी है। अतः आपसे आग्रह है कि जिस प्रकार सेल के राउरकेला इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा राउरकेला अस्पताल का संचालन का जिम्मा अपोलो इंडिया को सौंपा गया है , ठीक उसी तर्ज पर व्यापक जनहित में बोकारो जनरल अस्पताल का संचालन भी किसी बड़े अस्पताल समुह जैसे : अपोलो इंडिया , एस्कॉर्ट्स , फोर्टिस , मैक्स , नारायणी , मेदांता आदि को दिया जाय , ताकि बोकारो के स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में गुणात्मक सुधार हो सके.

बोकारो स्टील ऑफिसर एसोसिएशन के प्रेजिडेंट ए के सिंह ने BGH को लेकर कही बड़ी बात –

बोकारो इस्पात प्रबंधन को का प्रबंधन अपोलो अस्पताल के सहयोग से संयुक्त रूप से बीजीएच चलाने की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए. हमारे पास कार्डियोलॉजी, गैस्ट्रो, नेफ्रोलॉजी आदि के लिए पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं.

किम्स -HMS के जनरल सेक्रेटरी और NJCS सदस्य राजेंद्र सिंह ने कर्मचारियों संग की मीटिंग-

राजेंद्र सिंह ने कहा कि कर्मचारी पहले से चाहते है की BGH में सुधार हो. यह BGH की स्तिथि गंभीर है. राउरकेला की तरह बीएसएल के डायरेक्टर इंचार्ज को भी BGH को बड़े अस्पताल को दे देना चाहिए. हम इसके 110 परसेंट पक्ष में है. इसके लिए अब अब सेल ऑफिस में भी आवाज़ उठाएंगे. आज ब्लास्ट फर्नेस में मीटिंग के बाद हमने सीजीएम और जीएम से इसको लेकर चर्चा की है.

पूर्व विधायक और आजसू (AJSU) के वरीय नेता उमाकांत रजक ने कहा की BGH को…

उमाकांत रजक ने बीजीएच के स्वास्थ व्यवस्था को सुधारने की मांग की हैं. इतना बड़ा इफ्रास्ट्रक्टर और कीमती इक्विपमेंट के रहते बीएसएल प्रबंधन अच्छे डॉक्टरों को नहीं ला पा रहा है. बीएसएल प्रबंधन को चिकित्सा व्यवस्था में सुधार को लेकर कड़ा कदम उठाने की जरुरत है.

जय झारखण्ड मजदुर समाज के जनरल सेक्रेटरी बी के चौधरी भी अपोलो के पक्ष में-

बी के चौधरी ने कहा कि बीजीएच के स्तिथि को देखते हुए इसे अपोलो जैसे बड़े ग्रुप को दे देना चाहिए. यहां के कर्मचारियों और जनता के हित में यह जरुरी है. बीजीएच की चिकित्सा व्यवस्था के साथ-साथ का सारा सिस्टम फेल हो गया है। राउरकेला ने जनहित में बढ़िया काम किया है.

बोकारो स्टील वर्कर यूनियन सह NJCS नेता वीरेंद्र चौबे ने भी BGH की गिरती चिकित्सा व्यवस्था पर…

वीरेंद्र चौबे ने कहा कि वह खुलकर BGH को किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल को देने की मांग करते है. वर्तमान में बीजीएच की स्तिथि ठीक नहीं है. वह पत्र लिखकर सेल चेयरमैन और डायरेक्टर इंचार्ज से बीजीएच को किसी बड़े ग्रुप के हाथो सौपने की मांग करते है. इससे न सिर्फ कर्मचारी बल्कि रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ-साथ बोकारो के जनता का भी भला होगा.

सेंट्रल ऑफ़ स्टील वर्कर के देवदीप सिंह दिवाकर ने कहा BGH को बेहतर करें-

देव सिंह दिवाकर ने कहा कि वह निजी के पक्ष में नहीं है, पर BGH को सुधार की जरुरत है. बीएसएल प्रबंधन BGH के चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करें. कोरोना काल में प्राइवेट अस्पताल के तुलना में BGH और सरकारी अस्पताल ही लोगो के जीवन का सहारा बने थे. हमें बीजीएच में सुधार के साथ इस बनाये रखना है.

बोकारो शहर के प्लाट होल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र विश्वकर्मा ने राउरकेला को सराहा-

राजेंद्र विश्वकर्मा ने राउरकेला स्टील प्लांट प्रबंधन की सराहना की है. उन्होंने ने कहा कि बिना देर किये बीएसएल प्रबंधन को भी BGH को लेकर ऐसा कदम उठाना चाहिए। इससे इस शहर में रहने वाले सभी का भला होगा. BGH की गिरती चिकित्सा व्यवस्था के चलते सबका विश्वास उससे उठता जा रहा है. यहां की जनता चाहती है की BGH में सुधार हो पर वह होता नहीं दिख रहा है. राउरकेला की तरह BGH को भी अपोलो या और कोई बड़े ग्रुप को देकर BSL को अपना सामाजिक दायित्व निभाना चाहिए.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के बोकारो प्रेजिडेंट डॉ रणधीर सिंह ने इस कदम की तारीफ की-

डॉक्टर रणधीर सिंह ने कहा कि बोकारो में अगर अपोलो जैसा बड़ा ग्रुप आ जायेगा तो इस इलाके का भाग्य चमक जायेगा. जनहित में यह होना चाहिए. अगर कम्पलीट सेट ऑफ़ हॉस्पिटल होगा तो यहां की जनता सबसे अधिक लाभांवित होगी.

बोकारो चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के संजय बैद BGH को सौपने के पक्षधर –

संजय बैद ने कहा कि बोकारो जनरल अस्पताल पूर्वी भारत के सबसे बड़े अस्पतालों में से है, पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में यहां के मरीजों को अन्य जगहों पर जाना पड़ता है. काफी संख्या में यहां के कर्मचारियों एवं आश्रितों को रेफर भी किया जाता है. ऐसे में बेहतर होगा कि किसी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित अस्पताल के साथ अनुबंध करें जिससे यहां के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सके.

बोकारो अनएडेड स्कूल्ज मैनेजमेंट फॉर्म के अध्यक्ष सुरेंद्र पाल सिंह का भी रिएक्शन पॉजिटिव-

सुरेंद्र पाल सिंह जो गुरु गोबिंद सिंह एजुकेशनल सोसाइटी के सेक्रेटरी है और BGH में वरीय अधिकारी के पद पर सेवा दे चुके है ने कहा कि या तो बीएसएल प्रबंधन BGH को पुराने ढर्रे में ले आये और अगर उसमे सक्षम नहीं है तो प्राइवेट अस्पताल के हाथो में देना बेहतर विकल्प है. BGH की हालत अच्छी नहीं है. ऐसे स्तिथि में राउरकेला ने जो पैटर्न अपनाया किया है उसे BSL को भी अपनाना चाहिए.

SAIL ST-SC Employees Federation के अध्यक्ष शम्भू कुमार ने BGH को तुरंत जनहित में…

शम्भू कुमार ने कहा कि BGH को अपोलो जैसे प्राइवेट हॉस्पिटल को सौपने से लोगो को बेहतर (quality treatment) मिलेगा। कर्मचारी हो या आम जनता इलाज के लिए बहार जाने से बचेंगे. उनको परेशानी भी कम होगी. बीएसएल का राजस्व भी बचेगा. जनहित और कर्मचारिहित में BGH को दे देना बढ़िया रहेगा.

बोकारो विस्थापित रैयत संघ के महसचिव भगवान साव ने BGH की स्तिथि को दयनीय बताया-

भगवान साहू जो पेशे से वकील भी है और कई मामलो में विस्थापितों की लड़ाई लड़ रहे है ने कहा कि बोकारो जनरल अस्पताल की स्तिथि काफी दयनीय है. इसको सुधारना प्रबंधन के बुते का नहीं दिख रहा. अगर बीएसएल प्रबंधन करने में सक्षम होता तो कर चूका होता. इसलिए राउरकेला के तर्ज पर इसको तुरंत अपोलो जैसे संसथान को दे देना चाहिए.

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होटल व्यवसायी अमित जोहर: चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के लिए BGH को बेहतर हाथों में देना जरुरी

अमित जोहर ने कहा की पीपीपी मोड में पुरे देश में कई काम हो रहे है. राउरकेला जैसा कदम बीएसएल को भी उठाना चाहिए. बड़े प्राइवेट प्लेयर्स के आने से चिकित्सा व्यवस्था सुधरेगी. इससे आम जनता का भला होगा. BGH के इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रोरो के मशीनों का सदुपयोग होगा.

अधिवक्ता सुबोध कुमार ने BGH को ….

सुबोध कुमार के अनुसार बीएसएल प्रबंधन के पास BGH को लेकर दो रास्ते बचे है. पहला या तो पूरी ताकत से BGH को सुधारा जाये या फिर दूसरा रास्ता अपोलो जैसे अस्पताल के हाथो देने का बचता ही है. जैसा राउरकेला में हुआ. जनता को बेहतरीन चिकित्सा व्यवस्था चाहिए.

विस्थापित संघर्ष मोर्चा के गुलाब चंद्र ने BGH को लेकर कही यह बात-

गुलाब चंद्र ने कहा कि BGH की हालत खस्ता है, पर प्राइवेट हाथो में देने से बढ़िया होगा की BSL इसको सुधारे. हमलोग देश को प्राइवेट हाथो में देना नहीं चाहते.

विस्थापित साँझा मोर्चा के सयोंजक सदस्य अरबिंद कुमार ने भी BGH को लेकर की चिंता व्यक्त-

अरबिंद कुमार ने कहा बढ़िया तो यह होता की BGH को सुधारा जाता. उसको फिर जैसा बढ़िया बनाया जाता. BGH की गिरती चिकित्सा व्यवस्था विस्थापित ही नहीं सभी के चिंता का विषय है.

JMM सिटी प्रेजिडेंट एंव विधानसभा प्रत्याशी रहे मंटू यादव BGH को निजी हाथो में देने का….

मंटू यादव ने कहा कि पहले करोड़ रूपये खर्च कर अस्पताल बनाया, फिर अपोलो जैसे प्राइवेट अस्पताल को दे दिया. यह कहा तक सही है आप ही बताइये. आज गरीब व आम लोग सस्ते दर पर बीजीएच में इलाज करा लेते हैं. बोकारो विधायक चाहते हैं कि उनके अस्पताल को चालू होने से पहले बीजीएच भी निजी हाथों में चला जाए. इस तरह के प्रयास का पूरजोर विरोध होगा.

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