Bokaro: स्टील बनाना जितना आसान नहीं, उतना ही मुश्किल है उससे निकलने वाले कार्बन का हिसाब रखना। लेकिन अब बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) ने इस चुनौती को तकनीक के हवाले कर दिया है। शुक्रवार को संयंत्र में अत्याधुनिक ग्रीनहाउस गैस (GHG) डैशबोर्ड का शुभारंभ किया गया। यानी अब सिर्फ स्टील का उत्पादन ही नहीं, बल्कि उसके साथ वातावरण में कितना कार्बन गया, उसका भी डिजिटल हिसाब-किताब रखा जाएगा। दूसरे शब्दों में कहें तो अब “धुआं उड़ गया” कहकर कोई नहीं बच पाएगा।

अब हर यूनिट का होगा ‘कार्बन रिपोर्ट कार्ड’
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से सिंटर प्लांट, कोक ओवन, ब्लास्ट फर्नेस, स्टील मेल्टिंग शॉप और रोलिंग मिलों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की लगभग वास्तविक समय (Near Real-Time) में निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा। कौन-सी इकाई कितना कार्बन छोड़ रही है, किस जगह सुधार की जरूरत है और कहां उत्सर्जन कम किया जा सकता है, इसकी पूरी तस्वीर एक ही स्क्रीन पर उपलब्ध होगी।
ERP-SAP से सीधे जुड़ेगा डेटा, अनुमान नहीं अब आंकड़ों की बात
मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास) ने बताया कि ERP/SAP आधारित यह डैशबोर्ड प्रतिदिन उत्पादन से जुड़े आंकड़े स्वतः प्राप्त करेगा। इसके आधार पर संयंत्र के कार्बन फुटप्रिंट का सटीक आकलन किया जाएगा। यानी अब पर्यावरणीय फैसले केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि डेटा आधारित विश्लेषण पर लिए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार हुई प्रणाली
यह डैशबोर्ड बेंगलुरु की तकनीकी संस्था Centra World ने बीएसएल की तकनीकी समिति और सेल के पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग, कोलकाता के सहयोग से विकसित किया है। इसमें GHG Protocol, World Steel Association की कार्यप्रणाली, Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) और Carbon Credit Trading Scheme (CCTS) जैसे वैश्विक मानकों को शामिल किया गया है।
निदेशक प्रभारी बोले- डिजिटल तकनीक से मिलेगी हरित उत्पादन को गति
डैशबोर्ड का शुभारंभ बोकारो इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन ने किया। इस दौरान सेल के पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग के अधिशासी निदेशक, बीएसएल के सभी अधिशासी निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे। निदेशक प्रभारी ने कहा कि डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग संयंत्र को डी-कार्बोनाइजेशन के लक्ष्यों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी विभागों और टीमों की सराहना भी की।
हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में नया कदम
बीएसएल का कहना है कि जीएचजी डैशबोर्ड सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि हरित एवं सतत इस्पात उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे संयंत्र की दीर्घकालिक सतत विकास रणनीति को मजबूती मिलेगी और भारत के जलवायु लक्ष्यों की दिशा में भी योगदान सुनिश्चित होगा।
