Bokaro: बोकारो स्टील सिटी की बिजली व्यवस्था पर एक बार फिर संकट गहराता दिख रहा है। बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड (BPSCL) में कोयले का बफर स्टॉक अब महज तीन दिनों का रह गया है। पिछले कुछ सप्ताह से CCL और BCCL से कोयले की नियमित आपूर्ति नहीं होने का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। BPSCL का पावर जनरेशन सामान्य करीब 190 मेगावाट से घटकर अब लगभग 130 मेगावाट रह गया है। बता दें कि BSL को प्लांट चलाने के लिए करीब 240 MW और टाउनशिप के लिए करीब 55 MW बिजली की जरुरत है। जिसे वो DVC और BPSCL से लेता है।


टाउनशिप में रोटेशन पर काटी जा रही बिजली
पावर जनरेशन में कमी का असर बोकारो स्टील सिटी टाउनशिप की बिजली आपूर्ति पर भी दिख रहा है। मंगलवार को सेक्टरों में बिजली कटौती हुई। उपलब्ध बिजली को मैनेज करने के लिए बीएसएल टाउनशिप के अलग-अलग सेक्टरों में रोटेशन के आधार पर बिजली काटकर कुछ समय के लिए आपूर्ति कर रहा है। इस व्यवस्था का मकसद पूरी तरह बिजली बंद रखने के बजाय अलग-अलग इलाकों में थोड़े-थोड़े अंतराल पर बिजली उपलब्ध कराना है, ताकि घरों में इन्वर्टर आदि चार्ज हो सके। हालांकि लगातार हो रही कटौती से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रोजाना करीब 4 हजार टन कोयले की जरूरत
BPSCL को सामान्य संचालन के लिए रोजाना करीब 4,000 टन कोयले की जरूरत होती है। पहले प्लांट को लगभग प्रतिदिन एक रेक कोयला मिल रहा था, लेकिन अब दो से तीन दिनों के अंतराल पर आपूर्ति हो रही है। इससे प्लांट का बफर स्टॉक लगातार कम होता गया है। मंगलवार को एक रेक कोयला प्लांट पहुंचा, जिससे फिलहाल अभी कुछ राहत मिली है। हालांकि इसके बाद अगली रेक कब पहुंचेगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि प्लांट प्रबंधन के सामने कोयले की नियमित आपूर्ति बहाल कराना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

कोयले के साथ गैस की सप्लाई भी महत्वपूर्ण
BPSCL का बिजली उत्पादन केवल कोयले पर निर्भर नहीं है। प्लांट को ब्लास्ट फर्नेस गैस और कोक ओवन गैस की भी जरूरत होती है, जिसकी आपूर्ति बोकारो स्टील प्लांट (BSL) की ओर से की जाती है। बताया जा रहा है कि इन दिनों BSL की ओर से कोक ओवन गैस की सप्लाई में भी कमी हुई है। ऐसे में कोयले के साथ गैस की उपलब्धता में कमी ने पावर जनरेशन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।
पावर प्लांटों को प्राथमिकता से कोयला मिलने का असर
मानसून के दौरान कोयला खदानों में उत्पादन और परिवहन प्रभावित होने से आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ा है। वहीं, पावर सेक्टर की मांग को देखते हुए मंत्रालय स्तर से CCL और BCCL की आपूर्ति व्यवस्था में प्राथमिकता तय की गई है। BPSCL चूंकि बोकारो स्टील प्लांट की कैप्टिव पावर जरूरतों से जुड़ा प्लांट है, इसलिए उसे देश के पावर प्लांटों की तरह प्राथमिकता वाली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
BPSCL CEO ने कोयला कंपनियों से की आपूर्ति सामान्य करने की मांग
कोयले की कमी को देखते हुए BPSCL के CEO सुधीर व्यास ने संबंधित कोयला कंपनियों से आपूर्ति को सामान्य करने का अनुरोध किया है। प्लांट के लिए सबसे बड़ी चिंता अब बफर स्टॉक में बचे महज तीन दिनों के कोयले की है। यदि अगले कुछ दिनों में कोयले की रेक नियमित नहीं हुई, तो बिजली उत्पादन पर और असर पड़ सकता है। ज्ञात हो कि, BPSCL – SAIL और DVC – का संयुक्त उपक्रम है और बोकारो स्टील प्लांट की बिजली जरूरतों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पावर प्लांट में कोयले की कमी का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव बोकारो स्टील सिटी की बिजली आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
