Bokaro: गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल, बोकारो में बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के क्षमता संवर्धन कार्यक्रम (सीबीपी) के तहत ‘वित्तीय लक्ष्य एवं सेवानिवृत्ति नियोजन’ विषय पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। भाई नंद लाल जी सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य शिक्षकों को वित्तीय साक्षरता, बचत, निवेश और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी देना था।


वित्तीय साक्षरता से बेहतर भविष्य की तैयारी पर जोर
प्राचार्य अभिषेक कुमार के नेतृत्व में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर प्राचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में वित्तीय साक्षरता बेहद जरूरी है। आर्थिक संसाधनों का सही प्रबंधन और समय रहते वित्तीय लक्ष्यों का निर्धारण प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं शिक्षकों को व्यक्तिगत एवं पारिवारिक जीवन में बेहतर आर्थिक निर्णय लेने तथा भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहने में मदद करती हैं।
विशेषज्ञ ने समझाए बचत और निवेश के व्यावहारिक तरीके
कार्यशाला में संसाधन विशेषज्ञ पवन कुमार पांडेय ने संवादपरक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करने, नियमित बचत करने, निवेश के विभिन्न विकल्पों को समझने और सेवानिवृत्ति की योजना बनाने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। वह सेबी की स्मार्ट पहलों से जुड़े रहे हैं और एनएसई, बीएसई, एनआईएसएम तथा एनसीएफई के लिए निवेशक जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन कर चुके हैं। इसके अलावा, वह आयुसैट प्राइवेट लिमिटेड में कॉरपोरेट ट्रेनर और वेदान्नोवेशन फाउंडेशन में सलाहकार के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

आय, खर्च और निवेश के बीच संतुलन जरूरी
पवन कुमार पांडेय ने बताया कि आर्थिक सुरक्षा के लिए केवल आय अर्जित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आय, खर्च, बचत और निवेश के बीच संतुलन बनाना भी आवश्यक है। उन्होंने दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप योजनाएं बनाने, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने और निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रहने के लिए समय रहते योजना बनाना जरूरी है। सत्र के दौरान शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब प्राप्त किए।
विद्यालय प्रबंधन ने पहल को बताया उपयोगी
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष तरसेम सिंह और सचिव एस.पी. सिंह ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के क्षमता संवर्धन कार्यक्रम शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए काफी उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता से संबंधित प्रशिक्षण शिक्षकों को आर्थिक मामलों में जागरूक, आत्मविश्वासी और दूरदर्शी बनाने में मदद करेगा। साथ ही, इससे वे अपने वर्तमान संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए योजनाबद्ध तरीके से तैयारी कर पाएंगे।
शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से सफल रहा कार्यक्रम
कार्यशाला में उपप्राचार्य अमोलक सिंह, विभिन्न इकाइयों के प्रभारी और विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने प्रशिक्षण को प्रभावी और सार्थक बनाया। कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को वित्तीय नियोजन, बचत की आदतों और विवेकपूर्ण निवेश के महत्व को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समय रहते बनाई गई सही वित्तीय योजना सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक भविष्य की मजबूत नींव होती है।
