Bokaro Steel Plant (SAIL) Hindi News

ड्रैगन (चीन) के मुँह से छीन लिया निवाला, बोकारो स्टील के कर्मियों ने देश के लिए किया बड़ा काम


Bokaro: बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) के कर्मियों ने देश के लिए बड़ा काम किया है। आम भाषा में बोला जाये तो बीएसएल कर्मियों ने देशहित में ड्रैगन (चीन) के मुँह से उसका निवाला छीन लेने वाला काम किया है। बीएसएल (BSL) ने अपने प्रयासो से कंटेनर के वैश्विक उत्पादक चीन जैसे देश के एकाधिकार को ख़त्म कर भारत को मजबूती दी है।

बताया जा रहा है भारत को हर साल करीब 3.5 लाख कंटेनरों की जरूरत होती है। लेकिन भारत में कंटेनर का उत्पादन नहीं होता है। कंटेनर के लिए देश को मुख्य रूप से चीन पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन अब, स्टील मेजर बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने मौसम प्रतिरोधी स्टील का उत्पादन शुरू कर दिया है, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता कम हो जाएगी।

बीएसएल प्रवक्ता मणिकांत धान के अनुसार भारत में कंटेनर निर्माण को कंटेनर की कमी के समाधान के रूप में देखा जा रहा है जो चीन पर भारत की निर्भरता को समाप्त कर सकता है।

धान ने बताया कि सेल- बोकारो स्टील प्लांट (SAIL-BSL) ने “मौसम प्रतिरोधी स्ट्रक्चरल स्टील” को रोल करने के लिए के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से लाइसेंस प्राप्त कर एक अहम् उपलब्धि हासिल की है। यह लाइसेंस ग्रेड WR-Fe 480A (मौसम प्रतिरोधी संरचनात्मक स्टील के लिए सामान्य उपयोग), WR-Fe 480B (लो फॉस्फोरस माइक्रो-एल्लोएड मौसम प्रतिरोधी संरचनात्मक स्टील) और WR-Fe 490H (कंटेनर निर्माण के लिए) निर्दिष्ट मानकों के अनुसार स्टील रोल के लिए मिला है।

गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर शिपिंग ग्रेड कंटेनरों की भारी कमी देखी गई थी। सरकारी प्रतिबंधों और विनियमों के कारण दुनिया भर में कई कंटेनर बंदरगाहों, भंडारण सुविधाओं और जहाजों पर फंसे पड़े थे। बढ़ती मांग, बंदरगाह की भीड़भाड़ और बंद निर्माण कार्यों ने कमी को और भी बदतर बना दिया था।

इसके परिणामस्वरूप शिपिंग लाइनों द्वारा लगाए गए दुनिया भर में कंटेनर माल की दरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इससे भारत की निर्यात- आयात आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हुई। समस्या का अध्ययन करने और भारत में शिपिंग ग्रेड कंटेनरों के निर्माण के लिए क्षमता बनाने की योजना तैयार करने के लिए, जून 2022 में प्रधान मंत्री कार्यालय के निर्देश पर एक अंतर-मंत्रालय पैनल का गठन किया गया था।

उद्योग के स्टेक होल्डर्स के साथ बातचीत के दौरान पैनल ने पाया कि कंटेनर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला विशिष्ट स्टील भारतीय मानकों में उपलब्ध नहीं था। यह मामला भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के संज्ञान में लाया गय। जिसने अब घरेलू और एक्जिम व्यापार के लिए उपयोग किए जाने वाले घरेलू कंटेनर निर्माताओं की मांग के अबुरुप अपने भारतीय मानक (आईएस 11587:1986) में संशोधन किया और नए ग्रेड WR – Fe 490H की शुरुआत की है। यह कोर्टेन-स्टील के समतुल्य है।

मणिकांत धान ने बताया कि एक अग्रणी इस्पात निर्माता के रूप में बीएसएल ने स्टील के उपरोक्त ग्रेड के लिए बीआईएस से लाइसेंस प्राप्त कर लिया है। बोकारो स्टील प्लांट हॉट एवं कोल्ड रोल्ड कॉइल, प्लेट और शीट के रूप में नियमित रूप से मौसम प्रतिरोधी स्टील “सेलकोर” का उत्पादन करता है। यह कॉर्टन स्टील के लिए एक स्वदेशी समकक्ष ग्रेड है और इसका उपयोग भारतीय रेलवे द्वारा मौसम प्रतिरोधी संरचनात्मक/वैगन निर्माण के लिए किया जाता है।

बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) में आयात के विकल्प के तौर पर इन ग्रेडों के उत्पादन से आत्म-निर्भर भारत के विजन को मजबूती मिलेगी।


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